दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्थायी समिति ने बीते बुधवार को आखिरकार अटकी पड़ी कई अहम इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छता परियोजनाओं को मंजूरी दे दी। दो साल से अधिक समय तक स्थायी समिति के गठन में देरी के कारण यह मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, जिन प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति मिली है, उनमें गाजीपुर स्लॉटरहाउस में इंजेस्टा प्लांट (डंग प्रोसेसिंग यूनिट) का निर्माण, भारत दर्शन पार्क में 188 वाहनों के लिए मल्टीलेवल ऑटोमैटेड पजल पार्किंग, चार जोन (सेंट्रल, साउथ, वेस्ट, नजफगढ़) में चार लाख स्ट्रीट और पार्क LED लाइट्स का चरणबद्ध बदलाव और रखरखाव, 24 मैकेनिकल रोड स्वीपर्स की समग्र मरम्मत-देखरेख और 17 बैकहो लोडर्स की खरीद- सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए शामिल हैं।
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भारत दर्शन पार्क में हाई-टेक पार्किंग
खबर के मुताबिक, ₹31.6 करोड़ की लागत से बनने वाली यह मॉडर्न और हाईटेक पार्किंग सुविधा 12 महीनों में पूरी की जाएगी। इसमें 188 गाड़ियां पार्क हो सकेंगी। स्थायी समिति अध्यक्ष सत्य शर्मा के मुताबिक, एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस यह पार्किंग व्यवस्था पर्यटकों के लिए बड़ी राहत साबित होगी और ट्रैफिक नियंत्रण में मददगार बनेगी। जानकारी के मुताबिक, इनका निर्माण करने वाली एजेंसी स्थापना, परीक्षण, संचालन और 10 सालों तक मेंटेनेंस की भी जिम्मेदारी निभाएगी।
डंग प्रोसेसिंग प्लांट को मंजूरी
साल 2022 में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने गाजीपुर स्लॉटरहाउस की संचालन अनुमति यह कहते हुए रद्द कर दी थी कि वह एनजीटी के आदेश और पर्यावरण मानकों का उल्लंघन कर रहा है। 6 जुलाई 2022 को एनजीटी के निर्देश पर इसे समयबद्ध शर्तों के साथ दोबारा खोलने की मंजूरी मिली, जिनमें इंजेस्टा और आरओ प्लांट की स्थापना आवश्यक थी। आरओ प्लांट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर पहले ही स्थापित किया जा चुका है। इंजेस्टा प्लांट के लिए एमसीडी ने पिछले वर्ष एजेंसी तय की थी, लेकिन करीब ₹36 करोड़ की लागत के चलते इसे स्थायी समिति की स्वीकृति की आवश्यकता थी।
₹1,144 करोड़ की LED स्ट्रीट लाइट परियोजना
समिति ने दिल्ली के केंद्रीय, दक्षिणी, पश्चिमी और नजफगढ़ ज़ोन में चरणबद्ध तरीके से लगभग चार लाख LED स्ट्रीट और पार्क लाइट्स को बदलने और 10 सालों तक उनके संचालन और मेंटेनेंस के लिए प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। यह प्रोजेक्ट पहले एमसीडी हाउस में प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी पा चुकी थी, लेकिन रेट और एजेंसी फाइनल करने के लिए समिति की आखिरी मंजूरी जरूरी थी।