पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच सरकार ने सोमवार को कहा कि जरूरी सामानों की कीमतों में फिलहाल कोई 'असामान्य उतार-चढ़ाव' नहीं देखा गया है। सरकार ने कहा कि देशभर के थोक और खुदरा बाजारों में जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर लगातार नजर बनी हुई है। सरकार ने कहा कि देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अलावा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए गेहूं और चावल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। राज्यों को जरूरी खाद्य वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उपभोक्ता मामले विभाग के अतिरिक्त सचिव अनुपम मिश्रा ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।
रोजाना 528 केंद्रों से 40 वस्तुओं की कीमतों की जानकारी लेता है विभाग
अनुपम मिश्रा ने बताया कि विभाग रोजाना 528 केंद्रों से 40 वस्तुओं की कीमतों की जानकारी लेता है और इन्हें एक मोबाइल ऐप पर अपडेट किया जाता है। मिश्रा ने कहा, "अब तक जरूरी वस्तुओं की कीमतों में कोई असामान्य उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है।" दालों की स्थिति के बारे में उन्होंने कहा कि इस साल, पिछले साल की तुलना में ज्यादा उत्पादन होने का अनुमान है और सरकार के पास करीब 28 लाख टन का बफर स्टॉक है। तुअर (अरहर) और उड़द के आयात को मार्च, 2027 तक 'मुक्त श्रेणी' में रखा गया है। प्याज, आलू और टमाटर के बारे में उन्होंने कहा कि इनकी पैदावार पिछले साल के लगभग बराबर है और आपूर्ति पक्ष में कोई बाधा नहीं है।
सरकार ने प्याज का बफर स्टॉक बनाने के लिए शुरू की खरीद
सरकार ने प्याज का बफर स्टॉक बनाने के लिए खरीद भी शुरू कर दी है, जिससे कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा), 1955 के तहत राज्यों के पास जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई करने के अधिकार हैं और केंद्र सरकार इस संबंध में लगातार राज्यों के संपर्क में है। शिकायतों की निगरानी के लिए एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की संयुक्त सचिव सी. शिखा ने कहा, ''वर्तमान में लगभग 222 लाख टन गेहूं और 380 लाख टन चावल का भंडार उपलब्ध है, जो पीडीएस और आकस्मिक जरूरतों के लिए पर्याप्त है।''