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पाकिस्तान के व्यापार घाटे में 46 प्रतिशत की भारी-भरकम बढ़ोतरी, तेजी से बढ़ रहा आयात, निर्यात में गिरावट

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Oct 04, 2025 10:09 am IST,  Updated : Oct 04, 2025 10:09 am IST

पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान का व्यापारा घाटा 2.29 अरब डॉलर था, जो अब मुख्य रूप से आयात के 14 प्रतिशत बढ़कर 5.85 अरब डॉलर हो जाने और निर्यात के 11.7 प्रतिशत घटकर 2.5 अरब डॉलर रह जाने की वजह से बढ़ा।

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पिछले साल सितंबर में 2.29 अरब डॉलर था पाकिस्तान का व्यापारा घाटा Image Source : KARACHI PORT TRUST

भयावह नकदी संकट का सामना कर रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान का व्यापार घाटा सितंबर 2025 में बढ़कर 3.34 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत ज्यादा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, आयात बढ़ने और निर्यात में गिरावट आने के कारण देश के नाजुक बाह्य क्षेत्र पर दबाव बढ़ा है और मुद्रा की स्थिरता को खतरा पैदा हुआ। समाचारपत्र 'द न्यूज' ने शुक्रवार को पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो (PBS) के आंकड़ों के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट में ये जानकारी दी। 

पिछले साल सितंबर में 2.29 अरब डॉलर था पाकिस्तान का व्यापारा घाटा

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान का व्यापारा घाटा 2.29 अरब डॉलर था, जो अब मुख्य रूप से आयात के 14 प्रतिशत बढ़कर 5.85 अरब डॉलर हो जाने और निर्यात के 11.7 प्रतिशत घटकर 2.5 अरब डॉलर रह जाने की वजह से बढ़ा। अगस्त 2025 की तुलना में पाकिस्तान के व्यापार घाटे में 16.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में पड़ोसी देश का व्यापार घाटा सालाना आधार पर 32.9 प्रतिशत बढ़कर 9.37 अरब डॉलर हो गया। इस अवधि में आयात 13.5 प्रतिशत बढ़कर 16.97 अरब डॉलर का हो गया, जबकि निर्यात 3.8 प्रतिशत घटकर 7.6 अरब डॉलर रह गया। 

व्यापार घाटा बढ़ने से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ सकता है दबाव

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि देश का व्यापार घाटा बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ सकता है और पाकिस्तानी रुपये में अस्थिरता बढ़ सकती है। इतना ही नहीं, इसकी वजह से पाकिस्तान के लिए लोन का भुगतान भी काफी जटिल हो सकता है। बताते चलें कि करीब 25 करोड़ की आबादी वाला भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान विदेशी उधार पर अपना जीवन काट रहा है। वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक, आईएमएफ के अलावा चीन, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के पैसों पर पल रहा है।

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