भारत के दो सबसे बड़े आईटी और इंडस्ट्रियल हब पुणे और बेंगलुरु अब एक-दूसरे के और भी करीब आने वाले हैं। अगर आप इन दो शहरों के बीच सड़क मार्ग से यात्रा करते हैं, तो आपको पता होगा कि भारी ट्रैफिक और संकरे रास्तों की वजह से यह सफर कितना थका देने वाला होता है। लेकिन अब सरकार एक एक्सप्रेसवे बनाने की प्लानिंग कर रही है, जो न केवल आपकी यात्रा का समय आधा कर देगा, बल्कि विकास की एक नई इबारत लिखेगा।
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत बनने वाला पुणे-बेंगलुरु ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अब अंतिम मंजूरी के बेहद करीब है। अधिकारियों के अनुसार, अगले कुछ हफ्तों में इस प्रोजेक्ट के एलाइनमेंट को हरी झंडी मिल सकती है, जिसके बाद जमीन अधिग्रहण का काम शुरू होगा। यह एक्सप्रेसवे भारत के उन 25 चुनिंदा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर में शामिल है, जो देश की रफ्तार बदलने वाले हैं।
15 घंटे का सफर अब सिर्फ 7 घंटे में
फिलहाल, पुणे और बेंगलुरु के बीच की दूरी तय करने में लगभग 14 से 15 घंटे का समय लगता है। ट्रैफिक जाम और पुराने हाईवे की सीमाओं के कारण यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। लेकिन यह नया एक्सप्रेसवे गेमचेंजर साबित होगा। इसके पूरा होने के बाद, आप पुणे के आउटर रिंग रोड से बेंगलुरु के सैटेलाइट टाउन रिंग रोड (STRR) तक महज 7 घंटे में पहुंच सकेंगे। यानी आपका आधा समय बचेगा।
700 किमी लंबा और 8 लेन का होगा रास्ता
यह एक्सप्रेसवे लगभग 700 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें 6 से 8 लेन होंगी। यह एक 'एक्सेस-कंट्रोल्ड' हाईवे होगा, जिसका अर्थ है कि इस पर गाड़ियां बिना किसी रुकावट के तेज रफ्तार से दौड़ सकेंगी। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹45,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ के बीच आंकी गई है।
इन शहरों की चमक जाएगी किस्मत
यह एक्सप्रेसवे महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई शहरों से होकर गुजरेगा, जिससे वहां विकास के नए द्वार खुलेंगे। पुणे, सतारा, सांगली, बेलगावी, विजयनगर, दावणगेरे और तुमकुरु में एक्सप्रेसवे के किनारे नए उद्योग, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स पार्क और बिजनेस हब विकसित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे।
आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति
यह कॉरिडोर केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स के लिए भी संजीवनी बनेगा। पश्चिमी महाराष्ट्र के कृषि उत्पादों और बेंगलुरु के तकनीकी सामानों की आवाजाही तेज और सस्ती हो जाएगी। इससे दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा पहुंचेगा।