उत्तर प्रदेश में सड़क नेटवर्क को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। जल्द ही पूर्वांचल से दिल्ली तक सफर और भी आसान और तेज हो सकता है। दरअसल, प्रदेश में लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे बनाने की तैयारी शुरू हो गई है, जो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।
उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। मेरठ को नमो भारत और मेट्रो मिलने के बाद अब गंगा एक्सप्रेसवे एक नई बड़ी सौगात बनने जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी यूपी को सीधे पूर्वांचल से जोड़ेगा, जिससे लोगों का सफर पहले से कहीं आसान और तेज हो जाएगा।
NHAI ने दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के गणेशपुर–देहरादून सेक्शन को इस तरह डिजाइन किया है कि जहां एक ओर गाड़ियां रफ्तार से दौड़ेंगी, वहीं दूसरी ओर जंगल के बीच रहने वाले हाथी और अन्य वन्यजीव सुरक्षित रूप से अपने रास्ते पार कर सकेंगे।
यह एक्सप्रेसवे उत्तर भारत में कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देगा और दिल्ली से देहरादून की यात्रा को पहले से कहीं अधिक आसान और तेज बना देगा।
उत्तर प्रदेश में सड़कों का जाल अब केवल शहरों को नहीं, बल्कि विकास के नए गलियारों को भी जोड़ रहा है। आने वाले कुछ महीनों में तीन बड़े एक्सप्रेसवे पर वाहन फर्राटा भरते नजर आएंगे। इसके साथ ही यूपी में 22 एक्सप्रेसवे का मेगा ग्रिड तैयार किया जा रहा है, जो दिल्ली से पूर्वांचल तक सफर को आसान बना देगा।
भारत में सड़क निर्माण अब सिर्फ रफ्तार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बराबर महत्व दिया जा रहा है। चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे पर महिमंडलम रिजर्व फॉरेस्ट के बीच एक खास एनिमल ओवरपास बनाया जा रहा है, जहां नीचे से गाड़ियां गुजरेंगी और ऊपर से जंगली जानवर सुरक्षित आवाजाही कर सकेंगे।
सरकार चाहती है कि राज्य का छोटे-से-छोटा कस्बा भी एक्सप्रेसवे के साथ जुड़े, ताकि प्रदेश का कोई भी एक कोना, दूसरे कोने के साथ शानदार तरीके से कनेक्ट हो।
उत्तर प्रदेश के विकास नक्शे पर अब एक नई रफ्तार जुड़ने वाली है। गंगा एक्सप्रेस-वे के साथ-साथ प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर न सिर्फ यात्रा का समय घटाएगा, बल्कि जिन 12 जिलों से यह गुजरेगा, उनकी तकदीर ही बदल देगा।
भारत में सड़कें अब सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने का जरिया नहीं रहीं, बल्कि देश की बदलती तस्वीर और तेज रफ्तार विकास की पहचान बन चुकी हैं। कभी जाम और धूल से पहचाने जाने वाले हाईवे अब तकनीक, स्पीड और सुविधा का नया चेहरा दिखा रहे हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे के खुलने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश का पूर्वी उत्तर प्रदेश से सीधी कनेक्टिविटी होगी। एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर अत्याधुनिक कैमरे और हाईटेक सर्विस सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि टोल पर वाहनों का गुजरना आसान हो सके।
प्रोजेक्ट जब भी पूरा होगा, यह दिल्ली, नोएडा एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाला एक वैकल्पिक हाई-कैपेसिटी मार्ग उपलब्ध कराएगा। इससे नोएडा एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
नए पुणे-संभाजीनगर एक्सप्रेसवे के बनने से पुणे से छत्रपति संभाजीनगर तक की यात्रा सिर्फ दो घंटे में पूरी हो जाएगी।
सर्दियों की दस्तक के साथ ही कोहरा अब सड़कों पर खतरा बनकर उतरने लगा है। हर साल की तरह इस बार भी कम दृश्यता के कारण सड़क हादसों का जोखिम बढ़ गया है। इसी को देखते हुए नोएडा ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन ने बड़ा एहतियाती कदम उठाया है।
जिस दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का लोग सालों से इंतजार कर रहे थे, वह यात्रा को बेहद तेज और आरामदायक बना देगा। हालांकि, इस सुपरफास्ट सफर की एक कीमत भी चुकानी होगी। एक्सप्रेसवे से कार से यात्रा करने वालों को टोल टैक्स के रूप में अच्छी-खासी रकम खर्च करनी पड़ सकती है।
कॉमर्शियल गाड़ियों को रिफ्लेक्टर लगाने के भी निर्देश दिए हैं। बिना रिफ्लेक्टर एक्सप्रेसवे में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन भी जब्त कर ली जाएगी।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अक्षरधाम से शुरू होकर बागपत, शामली और सहारनपुर से होते हुए देहरादून पहुंचेगा। यह खेकड़ा में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से मिलेगा।
राजधानी दिल्ली और मुंबई के बीच की यात्रा का समय वर्तमान के लगभग 24 घंटे से घटकर मात्र 12 घंटे रह जाएगा। साल 2019 में आधारशिला रखे गए इस एक्सप्रेसवे को एक व्यापक नेटवर्क बनाने के लिए उत्तर प्रदेश और राजस्थान से भी जोड़ा जाएगा।
उत्तर प्रदेश और हरियाणा में आने वाले समय में विकास की नई तस्वीर तैयार होने जा रही है। जल्द ही इन दोनों राज्यों को देश का अब तक का सबसे लंबा हाईस्पीड कॉरिडोर मिलने वाला है।
उत्तर भारत की यात्रा करने वालों के लिए एक बड़ी सौगात सामने आई है। पहाड़ और मैदान के बीच की दूरी अब पहले से कहीं कम और आरामदायक होने वाली है, क्योंकि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाला ₹1.20 लाख करोड़ की लागत वाला मेगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अब जमीन पर उतर चुका है।
उत्तर प्रदेश में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का नेटवर्क लगातार विस्तार कर रहा है और अब राज्य सरकार एक और बड़ी सड़क क्रांति की तैयारी में है। यमुना एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए प्रस्तावित 74.3 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर काम तेज हो गया है।
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