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युद्ध की वजह से चावल निर्यात प्रभावित, माल भाड़ा 30% बढ़ा- कंटेनरों की भी किल्लत

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Mar 21, 2026 11:18 pm IST,  Updated : Mar 21, 2026 11:19 pm IST

रायसेन चावल फैक्टरी के संचालक मनोज सोनी ने बताया कि खाड़ी देश में मांग नहीं होने से पूसा बासमती धान के दाम 300 से 500 रुपये प्रति क्विटल तक गिर गए हैं, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है।

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बड़े उद्योगपतियों का लगभग 25 प्रतिशत कारोबार प्रभावित Image Source : AFP

पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात का मध्यप्रदेश से विदेशों में बासमती और उष्ण गैर-बासमती जैसे उच्च गुणवत्ता वाले चावल के निर्यात पर गंभीर असर दिख रहा है। इस पर राज्य के प्रमुख चावल निर्यातकों और उद्योग संचालकों ने चिंता जताई है। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के बासमती चावल और बालाघाट जिले के उष्ण गैर-बासमती चावल की विशेष पहचान है और इनका खाड़ी देशों सहित कई विदेशी मुल्कों में निर्यात होता है। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर एसोसिएशन के महामंत्री अजय भालोटिया ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण रायसेन जिले से विदेश में भेजे जाने वाला बासमती चावल बंदरगाहों, फैक्ट्रियों और वेयरहाउस में अटका हुआ है। उन्होंने कहा कि माल भाड़ा भी 30 प्रतिशत महंगा हो गया है जबकि कंटेनर की किल्लत भी हो गई है। 

उत्पादकों और निर्यातकों की चिंता बढ़ी

भालोटिया ने कहा कि इन सबके चलते निर्यातकों को न सिर्फ ज्यादा भाड़ा चुकाना पड़ रहा है बल्कि बंदरगाहों पर माल लटकने से आर्डर समय पर पूरा करना भी मुश्किल हो गया है। रायसेन जिले के मंडीदीप, सतलापुर, औबेदुल्लागंज, रायसेन, बरेली, उदयपुरा, उमरावगंज क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक चावल फैक्ट्रियां संचालित हैं, जिसमें उच्च कोटि का बासमती चावल निकालकर खाड़ी के देशों को निर्यात किया जाता है। भालोटिया ने कहा कि इन चावलों का ईरान, इराक, सऊदी अरब, जॉर्डन और दुबई सहित खाड़ी के कई अन्य देशों में बड़ी मात्रा में निर्यात होता है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ अमेरिका और इजराइल के युद्ध के कारण निर्यात पूरी तरह बंद होने से जिले की धान मिल बंद पड़ी हैं, जिसने उत्पादकों और निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। 

पूसा बासमती धान की कीमतें 300 से 500 रुपये तक गिरीं

रायसेन चावल फैक्टरी के संचालक मनोज सोनी ने बताया कि खाड़ी देश में मांग नहीं होने से पूसा बासमती धान के दाम 300 से 500 रुपये प्रति क्विटल तक गिर गए हैं, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे धान की आवक भी घटी है और कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने से आपूर्ति श्रृंखला कमजोर पड़ी है। उन्होंने कहा कि यदि युद्ध लंबा चला तो छोटे और मध्यम उद्योगों पर ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने बताया कि युद्ध के कारण जिले की अर्थव्यवस्था को झटका लगा है। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्ग से माल भेजने के लिए पर्याप्त कंटेनर तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा, "पहले यहां एक कंटेनर 2500 डॉलर में मिल जाता था। अब वह 3200 में भी आसानी से उपलब्ध नहीं है। भाड़ा बढ़ने से निर्यात लागत में सीधा इजाफा हुआ है।" 

बड़े उद्योगपतियों का लगभग 25 प्रतिशत कारोबार प्रभावित

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बड़े उद्योगपतियों का लगभग 25 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हुआ है, जबकि छोटे उद्योग संचालकों का व्यापार लगभग ठप्प होने की स्थिति में पहुंच गया है। चावल निर्यात से जुड़े एक उद्योगपति ने कहा कि निर्यात में आई इस गिरावट का सीधा असर जिले के स्थानीय धान बाजार पर भी पड़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मंडियों में धान की कीमत लगभग 1800 रुपये प्रति क्विंटल है, जो आने वाले समय में घटकर 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती है।

पीटीआई इनपुट्स के साथ

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