सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली स्पाइसजेट एयरलाइन और उसके चेयरमैन अजय सिंह की याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में हाई कोर्ट के 144.5 करोड़ रुपये जमा कराने के आदेश को चुनौती दी गई थी। ये विवाद कलानिधि मारन और केएएल एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड के साथ मध्यस्थता मामले से जुड़ा है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट का 19 जनवरी का आदेश बरकरार रखा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अजय सिंह पर 'अनावश्यक रूप से मुकदमेबाजी जारी रखने' के लिए एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट पर 144.51 करोड़ रुपये का बकाया
दिल्ली हाई कोर्ट ने जनवरी में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के 2023 के भुगतान एवं अनुपालन निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया। स्पाइसजेट ने 194.51 करोड़ रुपये देय होने को स्वीकार किया था। इसमें से 50 करोड़ रुपये पहले ही जमा किए जा चुके हैं, जबकि 144.51 करोड़ रुपये बाकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर स्पाइसजेट ने एक बयान में कहा कि उसने आदेश को ध्यान में ले लिया है और अदालत के सभी निर्देशों का पालन करेगी। इसके साथ ही स्पाइसजेट ने कहा कि इस घटनाक्रम का उसके दैनिक परिचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
2015 के शेयर ट्रांसफर से जुड़ा हुआ है पूरा मामला
बताते चलें कि ये मामला साल 2015 के शेयर ट्रांसफर समझौते से जुड़ा है, जिसके तहत कलानिधि मारन और केएएल एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड ने स्पाइसजेट में अपनी 58.46 प्रतिशत हिस्सेदारी अजय सिंह को बेच दी थी। एयरलाइन कंपनी ने कहा कि वो कलानिधि मारन और केएएल एयरवेज को अब तक 730 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है, जिसमें 580 करोड़ रुपये मूलधन और 150 करोड़ रुपये ब्याज शामिल हैं। बाकी के बचे हुए पैसे कोर्ट के निर्देश के अनुरूप जमा कराए जाएंगे।



































