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किसानों की मेहनत रंग लाई, इस साल गेहूं की रिकॉर्ड तोड़ पैदावार होगी, आटे के दाम नहीं बढ़ेंगे

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : May 12, 2025 11:17 pm IST,  Updated : May 12, 2025 11:17 pm IST

अधिकारियों ने देशभर में मौसम और जलाशयों की स्थिति को अनुकूल बताया, जिससे मौजूदा कृषि सत्र के लिए बेहतर संभावनाएं बन रही हैं।

Wheat - India TV Hindi
गेहूं Image Source : FILE

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा भारत का गेहूं उत्पादन इस वर्ष रिकॉर्ड 11.53 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से इस अनुमान पर कोई प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। चौहान ने बताया कि देश के सभी प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में फसल अब परिपक्वता अवस्था में पहुंच चुकी है। एक सरकारी बयान में मंत्री के हवाले से कहा गया, "गर्मी की लू और उच्च तापमान वास्तव में कटाई प्रक्रिया को तेज करने में मदद करेंगे। इसलिए दूसरे अग्रिम अनुमानों में कोई बदलाव होने की आशंका नहीं है।" इस घोषणा से स्पष्ट है कि देश में खाद्य सुरक्षा को लेकर स्थिति मजबूत बनी हुई है और आटे सहित अन्य गेहूं उत्पादों की कीमतों में स्थिरता बरकरार रहने की उम्मीद है।

इन राज्यों में कटाई पूरी हुई 

कृषि मंत्रालय द्वारा मार्च में जारी किए गए दूसरे अनुमान के अनुसार, वर्ष 2024-25 में देश में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 11.53 करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद है, जो कि पिछले साल के 11.33 करोड़ टन के मुकाबले करीब 2% अधिक है। मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में गेहूं की कटाई पूरी हो चुकी है, जबकि पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार में 2 मई तक कुछ हिस्सों में कटाई बाकी थी। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि देश के केंद्रीय खाद्यान्न भंडार की स्थिति संतोषजनक है और यह आवश्यक बफर स्टॉक से कहीं अधिक है। अब तक गेहूं का स्टॉक 177.08 लाख टन पर पहुंच चुका है, जो कि 74.60 लाख टन की बफर जरूरत से काफी अधिक है। इसी तरह, चावल का भंडार भी 135.80 लाख टन की बफर जरूरत के मुकाबले 389.05 लाख टन तक दर्ज किया गया है।

धान की बुवाई का रकबा बढ़ा

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जायद फसलों की बुवाई की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया कि इन कम अवधि की ग्रीष्मकालीन फसलों—जिन्हें आमतौर पर मार्च से जून के बीच उगाया जाता है—की बुवाई में इस साल अच्छी बढ़त देखने को मिली है।

दो मई तक धान की बुवाई का रकबा बढ़कर 32.02 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 28.57 लाख हेक्टेयर था। वहीं, दलहनों की बुवाई भी 18.47 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 20.67 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। मूंग और उड़द के रकबे में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

मंत्री चौहान ने अरहर, उड़द, चना और मसूर जैसी दालों की खरीद को प्राथमिकता देने की बात कही और अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।

बयान में यह भी कहा गया कि टमाटर, प्याज और अन्य सब्जियों की बुवाई के लिए अब भी समय उपलब्ध है, और मौजूदा बाजार कीमतें उत्साहवर्धक होने से सामान्य बुवाई रकबा हासिल होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने देशभर में मौसम और जलाशयों की स्थिति को अनुकूल बताया, जिससे मौजूदा कृषि सत्र के लिए बेहतर संभावनाएं बन रही हैं।

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