अमेरिका में विदेशी टैलेंट को रोकने की जद्दोजहद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो न सिर्फ अमेरिका की इकोनॉमी, बल्कि पूरी दुनिया के जॉब मार्केट का समीकरण बदल सकता है। ट्रंप ने ‘ट्रंप गोल्ड कार्ड’ लॉन्च करने का एलान किया है। यह एक खास इमिग्रेशन कार्ड, जो विदेशी प्रोफेशनल्स, खासकर भारत और चीन जैसे देशों के युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
ट्रंप ने इसे ग्रीन कार्ड जैसा, लेकिन उससे कहीं बेहतर बताते हुए कहा कि यह कार्ड विदेशी टैलेंट को अमेरिका में रोकने में मदद करेगा, साथ ही अमेरिकी कंपनियों को बेहतरीन ग्लोबल स्किल हायर करने में आसानी देगा। यह घोषणा उस समय आई है जब अमेरिका में हाई-स्किल्ड वर्कर्स की भारी मांग है और टेक कंपनियां लंबे समय से आसान इमिग्रेशन प्रक्रिया की मांग कर रही थीं।
क्या है ट्रंप गोल्ड कार्ड?
ट्रंप के अनुसार, यह कार्ड अमेरिकी कंपनियों को ज्यादा अधिकार देगा कि वे विदेशी स्टूडेंट्स और स्किल्ड वर्कर्स को ग्रेजुएशन के बाद तुरंत अमेरिका में रख सकें। वर्तमान में, कई प्रतिभाशाली युवा अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद वीजा रिन्यूअल या H-1B लिमिटेशन के कारण अपने देश लौटने को मजबूर हो जाते हैं। ट्रंप ने कहा कि Apple जैसी बड़ी कंपनियां इस मुद्दे पर उनसे लगातार बात कर रही थीं। उनका कहना है कि यह अब समस्या नहीं रहेगी। टिम कुक सबसे ज्यादा परेशान थे और अब वह बहुत खुश होंगे।
सरकार को होगा अरबों डॉलर का फायदा
ट्रंप ने दावा किया कि गोल्ड कार्ड से अमेरिकी खजाने में हर साल अरबों डॉलर का राजस्व आएगा, क्योंकि कंपनियों को इन कार्ड्स को खरीदने के लिए भुगतान करना होगा। यह पैसा सीधे यूएस ट्रेजरी में जाएगा।
भारत के लिए क्या मायने?
भारत के लाखों स्टूडेंट्स और टेक प्रोफेशनल्स के लिए यह ऐलान बड़ा मौका बन सकता है। जो युवा अमेरिका में पढ़ाई करते हैं और रोजगार पाना चाहते हैं, वे अब लंबे वीजा इंतजार और लॉटरी की अनिश्चितता से बच सकते हैं।
ग्लोबल जॉब मार्केट पर असर
- अमेरिकी कंपनियां विदेशी टैलेंट को तेजी से हायर कर पाएंगी
- यूरोप और कनाडा को मिल रही ब्रेन-ड्रेन बढ़त को झटका लग सकता है
- भारत और चीन जैसे देशों से टैलेंट आउटफ्लो और बढ़ सकता है



































