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अमेरिका के नए प्रतिबंधों से हिल जाएगी भारत की ऑयल सप्लाई! रूसी तेल पर लग सकती है बड़ी चोट, क्या अब महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Nov 23, 2025 01:28 pm IST,  Updated : Nov 23, 2025 01:28 pm IST

भारत की सस्ती तेल सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। अब तक रूस से मिलने वाले डिस्काउंटेड क्रूड ने भारत की जेब को राहत दी है लेकिन अमेरिका के नए प्रतिबंधों ने इस लाइफलाइन को हिला कर रख दिया है। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि आने वाले हफ्तों में भारत की रूसी तेल आयात पर बड़ी चोट पड़ सकती है।

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अमेरिका के ताजा प्रतिबंध ने बढ़ाई भारत की टेंशन! Image Source : CANVA

भारत की सस्ती तेल सप्लाई पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। अमेरिका ने रूस की दो सबसे बड़ी ऑयल कंपनियों Rosneft और Lukoil पर नए सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे भारत की रूसी तेल वाली लाइफलाइन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। पिछले दो साल से रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखने में काफी मदद मिली थी। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या नए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं? और क्या रूसी तेल की सप्लाई रुक जाएगी?

रूसी तेल पर 'सैंक्शन शॉक'

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत की रूसी क्रूड ऑयल खरीद अगले कुछ हफ्तों में तेज गिरावट दर्ज कर सकती है। हालांकि आयात पूरी तरह बंद नहीं होगा, लेकिन नए प्रतिबंधों की वजह से सप्लाई चौंकाने वाली तेजी से घटेगी। नवंबर में भारत रूस से 1.8–1.9 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल खरीद रहा था, लेकिन दिसंबर-जनवरी में यह गिरकर सिर्फ 4 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकती है, यानी 70% से ज्यादा की गिरावट।

किन कंपनियों ने रूसी तेल खरीदना बंद किया?

अमेरिकी प्रतिबंध लागू होते ही भारत की बड़ी रिफाइनिंग कंपनियों रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स ने फिलहाल रूसी तेल की खरीद रोक दी है। केवल रोसनेफ्ट बैक्ड नयारा एनर्जी ही रूस से आयात जारी रखेगी, क्योंकि वह पहले से ही उस तेल पर निर्भर है।

रूसी तेल पूरी तरह क्यों नहीं रुकेगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिबंध सिर्फ कुछ कंपनियों पर हैं, रूस के पूरे तेल उद्योग पर नहीं। इसलिए सर्गुटनेफ्टेगाज, गजप्रोम नेफ्ट और छोटे ट्रेडर्स अब भारत को तेल सप्लाई कर सकते हैं। यानी रूसी तेल खत्म नहीं होगा, बस यह ज्यादा घुमावदार रास्तों से आएगा।

क्या पेट्रोल और डीजल महंगे होंगे?

यदि रूस से सप्लाई तेजी से घटती है तो भारत को ममिडिल ईस्ट, अमेरिका, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से महंगा तेल खरीदना पड़ेगा। ऐसे में रिफाइनरियों की लागत बढ़ेगी, जिससे संभावना है कि ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा, रिफाइनिंग मार्जिन घटेंगे और भविष्य में कीमतें बढ़ सकती हैं।

भारत के सामने बढ़ी अनिश्चितता

विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में सप्लाई चेन बहुत अनिश्चित रहेगी। नई मध्यस्थ कंपनियां, शिप-टू-शिप ट्रांसफर, वैकल्पिक बैंकिंग चैनल और क्लीन रूसी तेल सप्लायर इस ट्रेंड को बदलेंगे।

क्या रूस का तेल बंद हो जाएगा?

पूरी तरह बंद होने की संभावना अभी भी बहुत कम है, क्योंकि भारत के लिए यह अब भी सबसे सस्ता ऑप्शन है। सरकार का फोकस सस्ते और स्थिर ईंधन पर है। अमेरिका ने अभी तक सेकेंडरी सैंक्शन भारत जैसे खरीदार देशों पर नहीं लगाए हैं, इसलिए रूसी तेल आएगा जरूर लेकिन कम, अनिश्चित और कहीं ज्यादा सीक्रेट रास्तों से।

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