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खुशखबरी! गेहूं हुआ सस्ता, सरकार के इस कदम से आई कीमतों में गिरावट

 Published : Feb 15, 2023 07:28 pm IST,  Updated : Feb 15, 2023 07:28 pm IST

थोक मूल्य 3,000 रुपये प्रति क्विंटल से गिरकर लगभग 2,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है, जबकि खुदरा मूल्य 3,300-3,400 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 2,800-2,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है।

Wheat- India TV Hindi
Wheat Image Source : AP

महंगाई की मार झेल रही आम जनता को सरकार के एक बड़े कदम से बड़ी राहत मिली है। बीते महीने सरकारी स्टॉक में रखे गेहूं को खुले बाजारों में बेचने से इसकी कीमतों में 5 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट आई है। केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बुधवार को कहा कि केंद्र के खुले बाजार में 30 लाख टन गेहूं बेचने के फैसले के बाद थोक और खुदरा बाजारों में गेहूं की कीमतों में करीब पांच रुपये प्रति किलोग्राम की कमी आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दरों को कम करने के लिए यदि जरूरी हुआ, तो और कदम उठाए जाएंगे। 

चोपड़ा ने कहा कि सरकार गेहूं और आटे (गेहूं का आटा) की कीमतों पर बारीकी से नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर कीमतों को कम करने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए मुक्त बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत अधिक गेहूं की पेशकश करने सहित अन्य कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध हटाने के किसी भी प्रस्ताव पर अभी विचार नहीं कर रही है। यह प्रतिबंध पिछले साल मई में गेहूं की खरीद में भारी गिरावट के बाद लगाया गया था। 

उन्होंने कहा, ‘‘जनवरी में ओएमएसएस की घोषणा के बाद से गेहूं की कीमतें नीचे आ गई हैं। थोक बाजारों में गेहूं की कीमतें 2,500 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम चल रही हैं।’’ उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में कीमतों में और गिरावट आएगी। उन्होंने कहा, ‘‘भारत सरकार बहुत चिंतित है और स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही है।” 

चोपड़ा ने कहा, 'कीमतों को कम करने के लिए और जो भी कदम उठाने की जरूरत होगी, हम उठाएंगे।' विकल्पों में ओएमएसएस के तहत मात्रा को मौजूदा 30 लाख टन से बढ़ाना और आरक्षित मूल्य को कम करना भी शामिल है। इस मौके पर खाद्य सचिव ने कहा कि थोक मूल्य 3,000 रुपये प्रति क्विंटल से गिरकर लगभग 2,500 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है, जबकि खुदरा मूल्य 3,300-3,400 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 2,800-2,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। 

पिछले महीने, सरकार ने गेहूं और गेहूं के आटे की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए ओएमएसएस के तहत अपने बफर स्टॉक से खुले बाजार में 30 लाख टन गेहूं बेचने की योजना की घोषणा की थी। 30 लाख टन में से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ई-नीलामी के माध्यम से आटा चक्की जैसे थोक उपभोक्ताओं को 25 लाख (2.5 मिलियन) टन गेहूं बेचेगा और दो लाख टन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को दिया जाएगा। 

गेहूं को आटे में बदलने के लिए संस्थानों और राज्य-पीएसयू को तीन लाख टन गेहूं रियायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। चोपड़ा ने कहा कि देशभर में बुधवार को 15 लाख टन गेहूं की दूसरे दौर की नीलामी हो रही है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार ने हाल ही में नेफेड और केंद्रीय भंडार जैसे संस्थानों के लिए गेहूं को आटे में परिवर्तित करने और उपभोक्ताओं को 27.50 रुपये प्रति किलोग्राम पर बेचने के लिए कीमतों को 23.50 रुपये से घटाकर 21.50 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है, जबकि पहले की दर 29.50 रुपये प्रति किलोग्राम थी। 

ओएमएसएस के तहत, केंद्र ने पिछले हफ्ते माल ढुलाई शुल्क को खत्म करने और ई-नीलामी के माध्यम से पूरे भारत में थोक उपभोक्ताओं को 2,350 रुपये प्रति क्विंटल के आरक्षित मूल्य पर अनाज बेचने का फैसला किया था। राज्यों को अपनी योजनाओं के लिए ई-नीलामी में भाग लिए बिना उपरोक्त आरक्षित मूल्य पर एफसीआई से गेहूं खरीदने की अनुमति है। एफसीआई 1-2 फरवरी के दौरान हुई पहली ई-नीलामी के दौरान 25 लाख टन में से 9.26 लाख टन गेहूं व्यापारियों, आटा मिलों आदि को पहले ही बेच चुका है। अगली नीलामी 15 फरवरी को होगी। खाद्यान्न की खरीद और वितरण के लिए सरकार की नोडल एजेंसी एफसीआई के पास बफर स्टॉक में 26 जनवरी तक लगभग 156.96 लाख टन गेहूं था। 

एक अप्रैल को, देश के पास 75 लाख टन के बफर मानक की आवश्यकता से अधिक 96 लाख टन का गेहूं का स्टॉक होगा। घरेलू उत्पादन में मामूली गिरावट और केंद्रीय पूल के लिए एफसीआई की खरीद में पर्याप्त गिरावट के बाद कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र ने पिछले साल मई में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। भारत का गेहूं उत्पादन फसल वर्ष 2021-22 (जुलाई-जून) में पिछले वर्ष के 10 करोड़ 95.9 लाख टन से घटकर 10 करोड़ 77.4 लाख टन रह गया, जो कुछ राज्यों में लू चलने के कारण हुआ। पिछले साल के लगभग 4.3 करोड़ टन की खरीद के मुकाबले इस साल खरीद तेज गिरावट के साथ 1.9 करोड़ टन रह गई। 

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