जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO बुधवार 21 अक्टूबर को खुलेगा, लेकिन इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) काफी मजबूत बना हुआ है। 30,213 करोड़ रुपये के इस IPO में 27 करोड़ नए शेयर शामिल हैं, जिनका प्राइस बैंड 1065 रुपये से 1119 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। ये इश्यू 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा और इसकी लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होनी है। कंपनी इस IPO से मिलने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल अपनी मुख्य सब्सिडिरी, रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (RJIL) के कर्ज को समय से पहले चुकाने के लिए करेगी।
जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ जीएमपी
इंडिया इन्फोलाइन के अनुसार, 19 अक्टूबर को इसका GMP 252 रुपये प्रति शेयर था। ये 1119 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड पर लगभग 22.52% का प्रीमियम दर्शाता है। इस आधार पर, ग्रे मार्केट में इसकी कीमत लगभग 1371 रुपये प्रति शेयर बैठती है, जिससे 12 शेयरों के एक लॉट पर 3024 रुपये का संभावित मुनाफा दिख रहा है। हालांकि, GMP बाजार की धारणा बताने वाला एक अनौपचारिक पैमाना है, जो तेजी से बदल सकता है। ये वास्तविक लिस्टिंग कीमत या लिस्टिंग से होने वाले मुनाफे की कोई गारंटी नहीं देता है।
एंकर बुक में भारी मांग
सोमवार को एंकर इन्वेस्टर्स के लिए खुली विंडो में भारी मांग देखने को मिली। वैश्विक संस्थागत निवेशकों की ओर से उपलब्ध शेयरों के मुकाबले 30 गुना ज्यादा बोलियां आईं। 8110 करोड़ रुपये के उपलब्ध शेयरों के लिए कुल 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बोलियां लगाई गईं, जो एक रिकॉर्ड है। इससे पता चलता है कि संस्थागत निवेशकों की भारी मांग अभी पूरी नहीं हुई है, जो लिस्टिंग के बाद सेकेंडरी मार्केट में भी देखने को मिल सकती है।
ब्रोकरेज फर्मों को ARPU और डिजिटल सेवाओं के विस्तार की उम्मीद
जानकारों का मानना है कि जियो की भविष्य की ग्रोथ काफी हद तक प्रति यूजर औसत रेवेन्यू (ARPU) को बढ़ाने, ग्राहकों को प्रीमियम प्लान लेने के लिए प्रोत्साहित करने और अपने डिजिटल-सर्विस पोर्टफोलियो का विस्तार करने पर निर्भर करेगी। फिलिपकैपिटल ने बताया कि 2016 में अपनी शुरुआत के बाद से, जियो ने आक्रामक कीमतों और अलग तरह की पेशकशों के जरिए भारत के टेलीकॉम परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। ब्रोकरेज फर्म को टैरिफ में बढ़ोतरी, ARPU में स्वाभाविक वृद्धि और डिजिटल सेवाओं से मिलने वाले अतिरिक्त राजस्व में संभावनाएं दिख रही हैं। इससे आने वाले सालों में कंपनी की कमाई में बढ़ोतरी हो सकती है।
SBICAPS का कहना है कि IPO की वैल्यूएशन जियो के बड़े पैमाने, कमाई के प्रदर्शन, तकनीकी क्षमताओं और भविष्य में लंबे समय तक कमाई करने की क्षमता को दर्शाता है। इसके अलावा, कर्ज चुकाने से मिलने वाले फायदों पर भी जोर दिया गया है, जिसमें फाइनेंस की लागत में कमी, बेहतर कैश फ्लो और भविष्य के निवेश के लिए ज्यादा फंड जुटाने की क्षमता शामिल है।
बेहतर कैश फ्लो से बढ़ता है वित्तीय लचीलापन
जियो के ऑपरेशनल परफॉर्मेंस के साथ-साथ कैश जनरेशन में भी सुधार हुआ है। Emkay के एक एनालिसिस के अनुसार, FY26 में परिचालन से प्राप्त कैश फ्लो लगभग 77,556 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं, कैपेक्स जो FY24 में राजस्व का 48.8 प्रतिशत था, वो FY26 में घटकर 23.3 प्रतिशत रह गया।
अगर ऑपरेशन्स से मिलने वाला कैश फ्लो मजबूत बना रहता है, तो कैपेक्स में कमी आने से कंपनी को नई तकनीकों में निवेश करने, डिजिटल सर्विस का विस्तार करने और अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने के लिए ज्यादा लचीलापन मिल सकता है।
सेंट्रम ब्रोकिंग ने जियो प्लेटफॉर्म्स की इक्विटी वैल्यू लगभग 11.5 लाख करोड़ रुपये आंकी है। इसके लिए उन्होंने टेलीकॉम और अन्य डिजिटल बिजनेस के लिए अलग-अलग मूल्यांकन तरीकों का इस्तेमाल किया है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY26 से FY29 के बीच राजस्व, EBITDA और टैक्स के बाद के मुनाफे में क्रमशः लगभग 14 प्रतिशत, 16 प्रतिशत और 16 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक दर (CAGR) से वृद्धि होगी।
ब्रोकरेज के अनुसार, टैरिफ में संभावित बढ़ोतरी, प्रीमियम पेशकशें और डिजिटल सेवाओं को ज्यादा लोगों द्वारा अपनाना- ये सभी ARPU में बढ़ोतरी के मुख्य कारक हैं।
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