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8 दिसंबर से बदल जाएंगे F&O ट्रेडिंग के नियम! NSE करने जा रहा प्री-ओपन सेशन की शुरुआत, इन्वेस्टर्स के ट्रेड पर क्या पड़ेगा असर?

Edited By: Shivendra Singh Published : Nov 04, 2025 12:05 pm IST, Updated : Nov 04, 2025 12:05 pm IST

शेयर बाजार में ट्रेड करने वालों के लिए बड़ी खबर है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने ऐलान किया है कि वह 8 दिसंबर 2025 से इक्विटी डेरिवेटिव (F&O) सेगमेंट में प्री-ओपन सेशन की शुरुआत करने जा रहा है।

शेयर बाजार में 8 दिसंबर...- India TV Paisa
Photo:CANVA शेयर बाजार में 8 दिसंबर से लागू होंगे नए

भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बड़ी खबर आई है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट में प्री-ओपन सेशन शुरू करने का ऐलान किया है। ये नया सिस्टम 8 दिसंबर 2025 से लागू होगा। NSE का कहना है कि यह कदम बाजार में बेहतर प्राइस डिस्कवरी  और स्मूद ओपनिंग सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

अब तक F&O मार्केट में ट्रेडिंग सीधे 9:15 बजे शुरू होती थी, लेकिन 8 दिसंबर से पहले सुबह 9:00 से 9:15 बजे तक एक प्री-ओपन सेशन चलेगा, जो तीन हिस्सों में बंटा होगा-

  • ऑर्डर एंट्री पीरियड (9:00 AM - 9:08 AM): इस दौरान ट्रेडर्स अपने ऑर्डर लगा सकते हैं, मॉडिफाई या कैंसिल कर सकते हैं। यह विंडो रैंडम रूप से 7वें से 8वें मिनट के बीच बंद हो जाएगी।
  • ऑर्डर मैचिंग और ट्रेड कन्फर्मेशन (9:08 AM - 9:12 AM): इस दौरान सिस्टम इक्विलिब्रियम प्राइस तय करेगा और उसी के आधार पर ऑर्डर मैच किए जाएंगे।
  • बफर पीरियड (9:12 AM - 9:15 AM): यह छोटा अंतराल प्री-ओपन सेशन और सामान्य ट्रेडिंग के बीच सेतु का काम करेगा।

सिंगल स्टॉक्स और इंडेक्स फ्यूचर्स पर लागू होगा नियम

NSE ने साफ किया है कि यह प्री-ओपन सेशन सिंगल स्टॉक्स और इंडेक्स फ्यूचर्स दोनों पर लागू होगा, लेकिन यह फार-मंथ (M3) कॉन्ट्रैक्ट्स, स्प्रेड और ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स पर लागू नहीं होगा। उदाहरण के लिए, अगर दिसंबर 2025 एक्सपायरी (M1) वाले कॉन्ट्रैक्ट्स हैं, तो इन पर 1 दिसंबर से एक्सपायरी डेट 30 दिसंबर तक प्री-ओपन सेशन लागू रहेगा। वहीं, एक्सपायरी से पांच दिन पहले यह सिस्टम अगले महीने (जनवरी 2026) के कॉन्ट्रैक्ट्स पर भी लागू हो जाएगा।

NSE के मुताबिक, यह कदम वॉलैटिलिटी घटाने, लिक्विडिटी बढ़ाने और ट्रांसपेरेंसी सुधारने की दिशा में बड़ा सुधार साबित होगा। ट्रेडर्स को रियल टाइम में इंडिकेटिव प्राइस, इक्विलिब्रियम डेटा और डिमांड-सप्लाई की जानकारी भी मिलेगी। फाइनेंशियल एक्सपर्ट का मानना है कि NSE का यह कदम भारतीय डेरिवेटिव मार्केट को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के करीब लाने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे न केवल बाजार की स्थिरता बढ़ेगी, बल्कि शुरुआती घंटों में तेज उतार-चढ़ाव की स्थिति भी काफी हद तक कंट्रोल हो सकेगी।

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