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टैक्‍स सेविंग के साथ करें जोरदार कमाई, यहां निवेश करने पर मिलेगा 40% तक का रिटर्न

 Written By: Manish Mishra
 Published : Feb 24, 2017 07:34 am IST,  Updated : Jul 16, 2017 07:07 pm IST

इनकम टैक्‍स बचाने के साथ-साथ आप 40 फीसदी तक का सालाना रिटर्न पा सकते हैं। टैक्‍स सेविंग के लिए ELSS चुन कर आप दोहरा लाभ उठा सकते हैं। लॉक-इन अवधि भी 3 साल है।

टैक्‍स सेविंग के साथ करें जोरदार कमाई, यहां निवेश करने पर मिलेगा 40% तक का रिटर्न- India TV Hindi
टैक्‍स सेविंग के साथ करें जोरदार कमाई, यहां निवेश करने पर मिलेगा 40% तक का रिटर्न

नई दिल्‍ली। क्‍या आप टैक्‍स बचाने के साथ-साथ 40 फीसदी तक का रिटर्न भी पाना चाहते हैं। टैक्‍स सेविंग के साथ-साथ बेहतर रिटर्न पाना कोई बड़ी बात नहीं है। इसके लिए आपके पास एक डीमैट अकाउंट होना जरूरी है। और इनकम टैक्‍स बचाने के लिए इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग्‍स स्‍कीम (ELSS) खरीदना होगा। अगर हम पिछले एक साल के रिटर्न पर नजर दौड़ाएं तो कुछ ELSS फंडों ने तो 40 फीसदी से भी अधिक का रिटर्न दिया है। ELSS इनकम टैक्‍स अधिनियम की धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपए तक की कटौती का लाभ देते हैं।

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क्‍या हैं ELSS और क्‍या है इनकी खासियत

  • ELSS शेयरों में निवेश करते हैं।
  • इनकी लॉक-इन अवधि तीन साल है।
  • टैक्‍स सेविंग के जितने भी विकल्‍प हैं उनमें सबसे कम लॉक-इन अवधि ELSS की ही है।
  • लॉक-इन अवधि का मतलब उस अवधि से है जिस दौरान आप अपने निवेश किए पैसे वापस नहीं निकाल सकते।
  • ऐतिहासिक तौर पर देखें तो एक एसेट क्लास के तौर पर इक्विटी अपेक्षाकृत ज्यादा रिटर्न अर्जित करने में सफल रहते हैं।
  • यह एसेट क्लास निवेशकों के लिए धनार्जन का प्रमुख जरिया माना जाता रहा है।

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एक साल में इन ELSS फंडों ने दिया 40 फीसदी से भी ज्‍यादा रिटर्न

धारा 80सी के तहत Tax Saving के अन्‍य विकल्‍प और उनकी खासियत

  • कर-बचत के विभिन्न विकल्‍प बाजार में मौजूद हैं जिनके गुण-धर्म, लॉक-इन अवधि, रिटर्न की दर और मैच्योरिटी पर टैक्‍सेशन के नियम भिन्न-भिन्न हैं।
  • एक तरफ जहां ऐसे ज्यादातर विकल्‍प एक निश्चित रिटर्न की पेशकश करते हैं वहीं कुछ प्रोडक्ट्स मार्केट-लिंक्ड रिटर्न देते हैं।
  • पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC), फिक्स्ड डिपॉजिट (5 साल की अवधि वाले), वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS), कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), होम लोन के मूलधन का रीपेमेंट आदि टैक्‍स सेविंग के लोकप्रिय विकल्‍प हैं।
  • इनमें से ज्यादातर विकल्‍प Tax Saving के पारंपरिक विकल्‍प हैं, जिनमें निवेश की अवधि लंबी होती है और ये निश्चित लेकिन कम ब्याज दर की पेशकश करते हैं।
  • कुछ मामलों में इनमें तरलता का अभाव भी होता है साथ ही अर्जित ब्याज पर कर का भुगतान करना होता है।
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