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गंभीर बीमारियों के लिए हेल्‍थ पॉलिसी में होता है वेटिंग पीरिएड, इंश्‍योरेंस लेते वक्‍त इन बातों पर दें ध्‍यान

 Written By: Surbhi Jain
 Published : Aug 06, 2016 10:00 am IST,  Updated : Aug 06, 2016 10:40 am IST

इंडिया टीवी पैसा की टीम आज वेटिंग पीरिएड को गहराई से समझाने की कोशिश करेगा जिससे आपको बीमारी के वक्‍त आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।

नई दिल्ली। नोएडा में एक सेल्‍स कंपनी नें जॉब करने वाले कार्तिक पिछले कई दिनों से बीमार थे। चेकअप करवाने पर उन्‍हें पता चला कि उनकी किडनी खराब हो चुकी है। जिसके लिए उन्‍हें ऑपरेशन करवाना होगा। कार्तिक बीमारी को लेकर चिंतित थे लेकिन खर्च के लिए नहीं। क्‍योंकि पिछले साल उन्‍होंने खुद और अपने परिवार के लिए हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी ली थी। उन्‍होंने जब बीमारी के इलाज के लिए इंश्‍योरेंस कंपनी से संपर्क किया तो उसने बीमारी का खर्च उठाने से इंकार कर दिया। कारण उनकी इस बीमारी के लिए कंपनी ने 4 साल का वेटिंग पीरिएड तय किया था। कार्तिक को बीमारी का खर्च खुद उठाना पड़ा।

कार्तिक जैसी स्थिति में आप भी फंस सकते हैं। इसलिए अगर आप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो कॉन्ट्रैक्ट में लिखी सभी बातों को ध्यान से पढ़ें। इनपेशेंट हॉस्पिटालाइजेशन, प्री और पोस्ट हॉस्पिटालाइजेशन, रोजमर्रा के दवाइयों के खर्चे, घर पर ट्रीटमेंट के दौरान खर्चे, ऑर्गन डोनर बेनिफिट्स आदि जैसे बेनिफिट्स पॉलिसी के खरीदते ही नहीं मिलते है। आपके हेल्थ बेनिफिट्स वेटिंग पिरियड के तहत आते हैं। इसके मुताबिक पॉलिसी होल्डर को हेल्थ बेनिफिट्स का लाभ उठाने के लिए एक निश्चित समय तक इंतजार करना पड़ता है। इंडिया टीवी पैसा की टीम आज वेटिंग पीरिएड को गहराई से समझाने की कोशिश करेगा जिससे आपको बीमारी के वक्‍त आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।

क्‍या होता है वेटिंग पीरिएड

इंश्‍योरेंस कंपनी आपको बीमारी के खर्च से राहत दिलाने के लिए कैशलैस या फिर रिएंबर्समेंट की सुविधा देता है। लेकिन गंभीर बीमारी जैसे कैंसर या ट्रांसप्‍लांट जैसी बीमारियों को कंपनी एक निश्चित अवधि के बाद ही कवर करती है। इसे ही वेटिंग पीरिएड कहते हैं। बाजार में उपलब्ध सभी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में वेटिंग पिरियड एक जैसे नहीं होते हैं। यह प्लान और इंश्योरेंस करने वाले पर निर्भर करता है।

क्‍यों होता है वेटिंग पीरिएड

वेटिंग पिरियड का उदेश्य किसी भी प्लान्ड क्लेम से बचना होता है। इंश्योरेंस कंपनियां पहली से ज्ञात बीमारियों के लिए क्लेम नहीं देती हैं। इसके लिए पॉलिसी शुरू होने के कुछ समय बाद पॉलिसी में दिए बेनिफिट्स का फायदा उठाया जा सकता है। पॉलिसी खरीदने से पहले वेटिंग पिरियड से जुड़े सभी क्लॉज जरूर पढ़ने चाहिए। हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी कॉन्ट्रैक्स में कई तरह के वेटिंग पिरियड दिए गए होते हैं।

इनिशियल वेटिंग पीरिएड

इसके तहत पॉलिसी शुरू होने के शुरुआती 30 दिनों तक किसी भी तरह से सर्जरी, बीमारी या ट्रीटमेंट के लिए क्लेम नहीं कर सकते। कई हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में इनिशियल वेटिंग पीरिएड 90 दिन तक का भी होता है।

पहले से हुईं बीमारियों के लिए वेटिंग पीरिएड

हेल्थ पॉलिसी लेने से पहले की बीमारियों पर यह लागू होता है। यह एक साल से लेकर चार साल तक का हो सकता है। ऐसी बीमारियां वेटिंग पिरियड के बाद इसके तहत आती है। वरिष्ठ नागरिकों की स्थिति में वेटिंग पिरियड थोड़ा छोटा होता है। यह केवल एक से दो साल का होता है।

निश्चित वेटिंग पीरिएड

कैटेरेक्ट, हर्निया, ट्यूमर, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट जैसी बीमारियां वेटिंग पीरिएड खत्म होने के बाद कवर होती है। निश्चित बीमारियों के ट्रीटमेंट प्लान और इंश्योरर पर निर्भर करते हैं।

मैटरनिटी के समय वेटिंग पीरिएड का फायदा-

मैटरनिटी बैनिफिट में बच्चे के पैदा होने से संबंधि मेडिकल खर्चे इसमें शामिल होते हैं। इसका लाभ उठाने के लिए वेटिंग पिरियड 9 महीने से लेकर 36 महीने तक का हो सकता है। बेहतर है कि फैमली शुरू करने से पहले पॉलिसी खरीद लेनी चाहिए।

पॉलिसी खरीदने से पहले ऑनलाइन सभी के वेटिंग पिरियड की तुलना जरूर करनी चाहिए। हमेशा ऐसे प्लान का चयन करें जिसका वेटिंग पिरियड कम हो। साथ वेडिंग पिरियड से जुड़ी सभी जानकारी भी हासिल करें ताकि भविष्य में कोई दिक्कत न आए।

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