केंद्रीय बजट में बायोफॉर्मा शक्ति को बढ़ाने और इस क्षेत्र पर फोकस बनाए रखने की बात कही गई है। इसके लिए पांच सालों के लिए 10 हजार करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ शुभारंभ होगा।
यूनियन बजट 2026 से पहले देश के हेल्थकेयर और मेडटेक सेक्टर की निगाहें सरकार की नीतियों पर टिक गई हैं। इलाज के तरीके तेजी से बदल रहे हैं और अब सर्जिकल रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मेडिकल डिवाइसेज सिर्फ भविष्य की बात नहीं रह गई हैं, बल्कि मौजूदा जरूरत बन चुकी हैं।
डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने कहा कि यूनियन बजट से पहले मेडिकल टेक्नोलॉजी और सर्जिकल रोबोटिक्स सेक्टर एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है।
यह समस्या अब सिर्फ व्यक्तिगत स्तर की नहीं रही। यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता से जुड़ी हुई है। समय आ गया है कि सरकार और इंडस्ट्री मिलकर इसे प्राथमिकता दें। बजट में सरकार इसके लिए कुछ खास प्रावधान की घोषणा करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026-27 का बजट स्वास्थ्य क्षेत्र की मौजूद चुनौतियों और भविष्य के अवसरों को ध्यान में रखते हुए भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत स्वास्थ्य हब बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक मांग यह भी है कि एक कुशलता से काम करने वाला इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर सिस्टम बनाने के लिए, जिला अस्पतालों को मजबूत किया जाना चाहिए।
पंजाब सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देने वाली नई स्वास्थ्य योजना लागू कर दी है। इस योजना के तहत अब पंजाब के हर परिवार को ₹10 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के नाम से शुरू की गई इस स्कीम का ऐलान मोहाली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान किया गया।
मंत्रालय ने कहा कि नियमित पॉलिसी की तुलना में ये पॉलिसी 70:30 और 50:50 प्रीमियम शेयरिंग के लिए क्रमशः 28 प्रतिशत और 42 प्रतिशत की छूट पर उपलब्ध होगी।
वित्त मंत्रालय ने भी कॉरपोरेट शासन की सर्वोत्तम प्रथाओं को बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए बैंकों और बीमा कंपनियों को ग्राहकों को बीमा पॉलिसियों की 'गलत-बिक्री' के प्रति बार-बार आगाह किया है।
हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी एक अच्छा विकल्प हो सकता है, खासकर जब आप बेहतर कवरेज या सेवा की तलाश में हैं। लेकिन इसे अपनाने से पहले इसके नियम, संभावित बढ़ी हुई लागत और नई शर्तों को समझ लेना जरूरी है।
वित्त मंत्री ने इस साल के बजट भाषण में, नई पीढ़ी के वित्तीय क्षेत्र सुधारों के तहत बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को मौजूदा के 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा था।
जीएसटी हटने के बाद आपकी अच्छी खासी रकम बचने वाली है। 22 सितंबर से अब जो भी निजी लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी रिन्यु होगी, लोगों को जीएसटी की रकम नहीं चुकानी होगी। इससे बड़ी राहत मिलेगी।
जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में हुए इस फैसले से प्रीमियम में कटौती होगी जिससे बिक्री में बढ़ोतरी संभव होगा। इससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा।
बीमा लोकपाल परिषद (CIO) की 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट में हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के नाम और उनके खिलाफ आई शिकायतों का जिक्र है।
हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की सेवाओं से परेशान होकर हर साल हजारों लोग बीमा लोकपाल में इनकी शिकायत दर्ज कराते हैं। शिकायतों के आधार पर बीमा लोकपाल परिषद (CIO) की 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट में सबसे ज्याजा शिकायतों वाली 5 कंपनियों की पहचान हुई है।
AHPI ने आरोप लगाया कि बजाज आलियांज ने कई सालों पुराने कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर अस्पतालों को भुगतान दरें तय कर रखी हैं और बढ़ती चिकित्सा लागत के अनुरूप इसमें बदलाव करने से इनकार कर रही है।
भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण जल्द ही इस प्रस्ताव पर एक परामर्श पत्र (कंसल्टेशन पेपर) जारी करेगा, जिसमें स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे जाएंगे। बीमा कंपनियां, उपभोक्ता और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसमें भाग लेंगे।
दोनों पॉलिसियां अलग-अलग जरूरतों को पूरा करती हैं और दोनों का होना आपके वित्तीय भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी है। लेकिन दोनों के बीच के फर्क को अगर पहले ही समझ लिया जाए तो आगे कोई पछतावा नहीं होगा।
गरीब औद जरूरतमंद लोगों के लिए आयुष्मान कार्ड वरदान साबित हुआ है। इससे लाखों लोगों को बड़ी बचत हो रही है।
अगर आप किसी पॉलिसी वर्ष में कोई क्लेम नहीं करते हैं, तो बीमा कंपनियां अगले वर्ष आपके बीमा राशि (sum insured) में बढ़ोतरी करती हैं। यह नो-क्लेम बोनस कहलाता है।
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