भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने अपनी ताजा वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि इंश्योरेंस सेक्टर में 'गलत बिक्री' एक गंभीर चिंता का विषय है और इंश्योरेंस कंपनियों को इसकी वजह का पता लगाने के लिए 'मूल कारण विश्लेषण' करने की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार, जीवन बीमा कंपनियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों की कुल संख्या वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग स्थिर रही है। ये संख्या 2023-24 में 1,20,726 थी, जो 2024-25 में 1,20,429 रही।
UFBP के तहत दर्ज शिकायतों की कुल संख्या में 22.14 प्रतिशत की बढ़ोतरी
हालांकि, 'अनुचित व्यावसायिक व्यवहार' (UFBP) के तहत दर्ज शिकायतों की कुल संख्या वित्त वर्ष 2023-24 के 23,335 से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 26,667 हो गई है। इस तरह, कुल शिकायतों में यूएफबीपी से जुड़ी शिकायतों की हिस्सेदारी पिछले वित्त वर्ष के 19.33 प्रतिशत की तुलना में वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 22.14 प्रतिशत हो गई है। बताते चलें कि इंश्योरेंस सेक्टर में 'गलत बिक्री' का मतलब ग्राहकों को नियम, शर्तों या उपयुक्तता के बारे में सही जानकारी दिए बिना बीमा उत्पादों की बिक्री करना है।
समय-समय पर 'मूल कारण विश्लेषण' करने की सलाह
IRDAI ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 में कहा, ''गलत बिक्री को रोकने या कम करने के लिए इंश्योरेंस कंपनियों को उत्पाद की उपयुक्तता का आकलन करने, वितरण चैनल पर उचित नियंत्रण लागू करने और गलत बिक्री की शिकायतों के समाधान के लिए योजना बनाने की सलाह दी गई है, जिसमें समय-समय पर 'मूल कारण विश्लेषण' करना शामिल है।''
गलत बिक्री के कारण बढ़ रहे हैं पॉलिसी बंद होने के मामले
वित्त मंत्रालय ने भी कॉरपोरेट शासन की सर्वोत्तम प्रथाओं को बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए बैंकों और बीमा कंपनियों को ग्राहकों को बीमा पॉलिसियों की 'गलत-बिक्री' के प्रति बार-बार आगाह किया है। गलत बिक्री के कारण अक्सर ग्राहकों पर प्रीमियम का बोझ बढ़ जाता है, जिसकी वजह से ग्राहक अपनी पॉलिसी को रीन्यू नहीं कराते हैं और पॉलिसी बंद होने के मामले बढ़ जाते हैं।



































