स्वास्थ्य बीमा आज के समय में बेहद अहम है। मेडिकल की लागत में डबल डिजिट में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) वन टाइम मैंडेट (ओटीएम) सुविधा यूजर्स को विशिष्ट लेनदेन के लिए अपने बैंक खातों में धनराशि को ‘ब्लॉक’ करने की अनुमति देती है। इस व्यवस्था में वास्तविक भुगतान किए बिना पैसों की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
अदानी परिवार पूरे भारत में समाज के सभी वर्गों के लोगों के लिए सस्ती, विश्व स्तरीय चिकित्सा देखभाल और चिकित्सा शिक्षा लाने की लागत को पूरी तरह से वहन करेगा।
बीमारियों के बढ़ने के साथ-साथ स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले खर्च में भी तेजी से वृद्धि हो रही है, इसलिए स्वास्थ्य बीमा अब एक जरूरत बन गया है।
आईआरडीएआई का कहना है कि वरिष्ठ नागरिक के पास आय के सीमित स्रोत हैं। स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में भारी वृद्धि होने पर वरिष्ठ नागरिक सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। यह मामला हमारा ध्यान आकर्षित कर रहा है और यह एक चिंता का विषय है।
संदीप नेलवाल ने कहा, ‘‘मजबूत बजट स्वस्थ कार्यबल की जरूरतों को पूरा करेगी भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा, जो ऑन्त्रेप्रेन्यॉरियल वेंचर्स को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण है। इससे हेल्थकेयर इक्विपमेंट और मेडिसिन सेगमेंट में लोकल लेवल पर इनोवेशन और मैन्यूफैक्चरिंग भी बढ़ेगी, जिससे इंपोर्ट कॉस्ट कम होगा।’’
1 फरवरी को पेश होने जा रहे बजट से बीमा कंपनियों को कई उम्मीदें हैं। देश की बीमा पहुंच 2022-23 में चार प्रतिशत की तुलना में 2023-24 में 3.7 प्रतिशत थी। जीवन बीमा उद्योग की पहुंच 2022-23 में तीन प्रतिशत से मामूली रूप से घटकर 2023-24 के दौरान 2.8 प्रतिशत हो गई।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि 60 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों के लिए डिडक्शन को वर्तमान के 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये करना चाहिए और यह एक जरूरी फैसला होना चाहिए।
Budget 2025 : हेल्थकेयर सेक्टर की मांग है कि सरकार जीवन रक्षक दवाओं पर जीएसटी और आयात शुल्क को खत्म करने का फैसला ले।
देश के प्राइवेट अस्पताल जीएसटी से राहत चाहते हैं, ताकि उनकी कमाई में बढ़ोतरी होने के साथ-साथ इलाज की लागत में कम खर्च आए। गाजियाबाद के यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीएमडी डॉ. पीएन अरोड़ा ने कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं पर इनपुट जीएसटी को कम किया जाना चाहिए।
टैक्स नियोजन की बात करें तो हमेशा सक्रिय रहने की कोशिश करें। आखिरी समय की भागदौड़ से बचें, क्योंकि इससे निवेश के गलत फैसले और गलतियां हो सकती हैं। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही अपनी टैक्स प्लानिंग की शुरुआत करें।
एनएटीएएचएलटीएच ने कहा कि कैंसर के इलाज की लागत को कम करने के लिए एलआईएनएसीएस जैसे ‘ऑन्कोलॉजी’ विकिरण उपकरणों पर सीमा शुल्क को हटाने और जीएसटी को घटाकर पांच प्रतिशत करने की आवश्यकता है।
ईएसआईसी के दायरे में आने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों को अपनी सामाजिक सुरक्षा योजना और देशभर में अस्पतालों के जबरदस्त नेटवर्क के जरिए हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल सुविधाएं प्रदान करता है।
बीमा विशेषज्ञों का कहना है कि को-पे उन लोगों के लिए आदर्श विकल्प है जो कम दावे करते हैं। वह इस विकल्प को चुनकर आसानी से पॉलिसी प्रीमियम को काफी कम कर सकते हैं।
मौजूदा समय में भारत के सिर्फ 5 प्रतिशत बुजुर्गों को संस्थागत देखभाल तक पहुंच है, और आधे से अधिक सामाजिक सुरक्षा के बिना रहते हैं। बुजुर्गों की स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण अंतर के साथ - प्रति 1,000 बुजुर्गों पर 0.7 अस्पताल के बिस्तर से भी कम है।
निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस आईपीओ ₹800 करोड़ मूल्य के 10.81 करोड़ इक्विटी शेयरों के नए निर्गम और ₹1,400 करोड़ मूल्य के 18.92 करोड़ शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) का कॉम्बिनेशन था।
1 सितंबर, 2024 तक प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के साथ कुल 29,648 अस्पताल जुड़े हुए हैं, जिनमें 12,696 प्राइवेट अस्पताल हैं, जहां PMJAY के तहत कवर व्यक्ति कैशलेस इलाज करा सकता है।
बीमा कंपनियां हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की प्रीमियम में लगातार बढ़ोतरी करती जा रही है। अगर आप भी प्रीमियम के बोझ से परेशान हैं तो कुछ बातों का ख्याल रखकर अच्छी खासी बचत कर सकते हैं।
आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसका उद्देश्य 12 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों (लगभग 55 करोड़ लाभार्थी) को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा प्रदान करना है।
इलाज और दवाइयों के बढ़ते खर्च को देखते हुए आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस होना बहुत जरूरी हो गया है। हेल्थ इंश्योरेंस आपको न सिर्फ इलाज और दवाइयों के ऊंचे खर्च से सुरक्षा देता है बल्कि टैक्स बेनिफिट्स भी देता है।
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