यूनियन बजट 2026 से पहले देश का मेडिकल टेक्नोलॉजी सेक्टर एक अहम मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ भारत के पास मजबूत क्लिनिकल टैलेंट, इंजीनियरिंग क्षमता और कम लागत का बड़ा फायदा है, तो दूसरी तरफ नीति समर्थन की कमी इस सेक्टर की रफ्तार को सीमित कर रही है। खासतौर पर सर्जिकल रोबोटिक्स और AI-आधारित हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं कि आने वाला बजट भारत को ग्लोबल मेडटेक हब बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा सकता है।
भारत के पास है ग्लोबल लीडर बनने का मौका
मेडटेक सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब केवल मेडिकल डिवाइसेज का उपभोक्ता नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का बड़ा केंद्र बन सकता है। देश में अनुभवी डॉक्टर, कुशल इंजीनियर और लागत-कुशल उत्पादन क्षमता मौजूद है। यही वजह है कि सर्जिकल रोबोटिक्स जैसे हाई-एंड सेगमेंट में ‘मेक इन इंडिया’ को वैश्विक पहचान मिल सकती है बशर्ते सरकार की ओर से सही नीति समर्थन मिले।
स्वदेशी R&D और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
आम बजट से पहले मेडटेक इंडस्ट्री की सबसे बड़ी मांग स्वदेशी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को प्रोत्साहन देने की है। इंडस्ट्री चाहती है कि कंपोनेंट-लेवल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिले, ताकि आयात पर निर्भरता घटे और लागत कम हो। इसके साथ ही, अस्पतालों में एडवांस टेक्नोलॉजी के क्लिनिकल एडॉप्शन को तेज करने के लिए नीतिगत सहूलियतें भी जरूरी मानी जा रही हैं।
GST और टैक्स इंसेंटिव से मिल सकता है बूस्ट
घरेलू स्तर पर बने मेडिकल डिवाइसेज़ पर GST को तर्कसंगत बनाने की मांग भी जोर पकड़ रही है। इंडस्ट्री का कहना है कि अगर टैक्स स्ट्रक्चर सरल और अनुकूल हुआ, तो इनोवेशन और स्केल दोनों को गति मिलेगी। इसके अलावा R&D पर टैक्स इंसेंटिव बढ़ाने और लॉन्ग-टर्म सस्ते फाइनेंस तक पहुंच आसान करने से स्टार्टअप्स और भारतीय कंपनियों को बड़ा सहारा मिल सकता है।
रेगुलेटरी और एक्सपोर्ट सुधार की जरूरत
मेडटेक कंपनियां रेगुलेटरी अप्रूवल और एक्सपोर्ट प्रोसेस को भी सरल करने की मांग कर रही हैं। इससे न सिर्फ घरेलू बाजार में नई तकनीकों की एंट्री तेज होगी, बल्कि भारतीय मेडिकल टेक्नोलॉजी को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने में भी आसानी होगी।
बजट 2026 से उम्मीदें
बजट 2026 को मेडटेक सेक्टर एक टर्निंग पॉइंट के तौर पर देख रहा है। अगर सरकार नीति, टैक्स और फाइनेंसिंग के मोर्चे पर ठोस कदम उठाती है, तो भारत सर्जिकल रोबोटिक्स और एडवांस हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी में दुनिया का अगला बड़ा लीडर बन सकता है।



































