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Agriculture Budget 2026: कृषि क्षेत्र में लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चरल सुधारों की जरूरत- टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट रेजिलिएंस पर होना चाहिए खास फोकस

एग्रीकल्चर इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों का कहना है कि इस बजट में सेक्टर की पूरी क्षमता को अनलॉक करने के लिए टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट रेजिलिएंस, क्रेडिट फ्लो, वैल्यू-एडेड प्रोडक्शन और बेहतर सप्लाई-चेन को प्राथमिकता देने की खास जरूरत है।

Edited By: Sunil Chaurasia
Published : Jan 31, 2026 09:44 am IST, Updated : Jan 31, 2026 09:44 am IST
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Photo:AP इनपुट सब्सिडी को दोबारा डिजाइन करने की जरूरत

Agriculture Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को देश का बजट पेश करने जा रही हैं। हर बार की तरह, इस बार भी देश के अलग-अलग सेक्टरों को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। इसके साथ ही, अलग-अलग सेक्टर अपने विकास और मुनाफे को लेकर सरकार से कई तरह की मांगें कर रहे हैं। इसी कड़ी में देश का कृषि और इससे जुड़े सेक्टर अब सरकार से सालाना योजनाओं से अलग लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चरल सुधारों की मांग कर रहे हैं, जिससे प्रोडक्टिविटी में सुधार हो, वैल्यू चेन मजबूत हों और किसानों को ज्यादा स्थिर और टिकाऊ कमाई की ओर बढ़ने में मदद मिले।

कैसे अनलॉक होगी कृषि क्षेत्र की पूरी क्षमता

एग्रीकल्चर इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों का कहना है कि इस बजट में सेक्टर की पूरी क्षमता को अनलॉक करने के लिए टेक्नोलॉजी, क्लाइमेट रेजिलिएंस, क्रेडिट फ्लो, वैल्यू-एडेड प्रोडक्शन और बेहतर सप्लाई-चेन को प्राथमिकता देने की खास जरूरत है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बजट ऐसे आर्किटेक्चर-लेवल के सुधार ला सकता है जिनका कृषि सेक्टर लंबे समय से इंतजार कर रहा है। उन्होंने बताया कि कृषि भारत की GDP में लगभग 18% का योगदान देती है और 45% से ज्यादा वर्कफोर्स को रोजगार देती है, फिर भी इसे कम प्रोडक्टिविटी, पानी के गलत इस्तेमाल और बिखरे हुए बाजारों से जुड़ी पुरानी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

इनपुट सब्सिडी को दोबारा डिजाइन करने की जरूरत

एक्सपर्ट्स के अनुसार, इनपुट सब्सिडी को फिर से डिजाइन करना एक बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि वे खपत के बजाय एफिशिएंसी पर फोकस करें। सेक्टर को वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किए गए पैकेज ऑफ प्रैक्टिस से जुड़े इंसेंटिव की जरूरत है जो प्रोडक्शन के नतीजों से जुड़े हों। परफॉर्मेंस-बेस्ड सपोर्ट मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है, संसाधनों की एफिशिएंसी बढ़ा सकता है और किसानों की इनकम को मजबूत कर सकता है। मशीनों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी पूरी तरह से DBT पर आधारित होनी और इसे FMTTI या BIS-अप्रूव्ड उपकरणों तक सीमित रखा जाना चाहिए। एक्सपर्ट्स ने कहा कि राज्यों को लास्ट-माइल इम्पैक्ट सुनिश्चित करने के लिए लाभार्थियों का चयन जारी रखना चाहिए।

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