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जुलाई में पहला एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा? यहां जानें सही तारीख, मुहूर्त और पारण का शुभ समय

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Jul 07, 2026 02:17 pm IST,  Updated : Jul 07, 2026 02:42 pm IST

जुलाई की पहली एकादशी अत्यंत ही फलदायी है। इस एकादशी का व्रत रखने से अठ्यासी हज़ार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फलों की प्राप्ति होती है। तो यहां जानिए एकादशी व्रत की डेट, मुहूर्त और पारण का समय।

जुलाई 2026 एकादशी व्रत- India TV Hindi
जुलाई 2026 एकादशी व्रत Image Source : INDIA TV

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी संकट दूर हो जाते हैं और उसे आर्थिक संपन्नता की भी प्राप्ति होती है। हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को एकादशी का व्रत रखा जाता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष के दौरान योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस एकादशी का व्रत रखने से अठ्यासी हज़ार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फलों की प्राप्ति होती है। तो चलिए जानते हैं कि जुलाई में पहली एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा और पूजा, पारण का शुभ समय क्या रहेगा।

जुलाई 2026 की पहली एकादशी कब है? 

जुलाई की पहली एकादशी यानी योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई को रखा जाएगा। हर साल यह एकादशी निर्जला एकादशी के बाद और देवशयनी एकादशी से पहले आती है। योगिनी एकादशी का व्रत करने से सारे पाप मिट जाते हैं और जीवन में समृद्धि और खुशहाली की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करना अठ्यासी हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर होता है।

योगिनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त और पारण का समय

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 10 जुलाई को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि का समापन 11 जुलाई को सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर होगा। योगिनी एकादशी का पारण 11 जुलाई 2026 को किया जाएगा। पारण के लिए शुभ समय दोपहर 2 बजकर 3 मिनट से दोपहर 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगा।

जुलाई 2026 का दूसरा एकादशी कब है?

जुलाई माह का दूसरा एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आने वाली एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं।शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु का शयनकाल प्रारंभ हो जाता है इसीलिए इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। देवशयनी एकादशी के चार माह के बाद भगवान विष्णु प्रबोधिनी एकादशी (देवउठनी एकादशी) के दिन जागते हैं। इन चार माह को चातुर्मास के नाम से जाना जाता है। चातुर्मास में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं लेकिन इन ये माह पूूजा पाठ, जप-तप और दान के लिए अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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