फेस्टिवल सीजन के दौरान मांग में बढ़ोतरी और निवेश गतिविधियों में सुधार से इंडियन इकोनॉमी को रफ्तार मिली।
इकोनॉमिक सर्वे 2025-2026 रिपोर्ट में कहा गया है कि बेस मेटल्स की कीमतों में तेजी और वैश्विक अनिश्चितताओं से जुड़े जोखिम अभी भी मौदूद हैं। निवेशकों को लगातार निगरानी और जरूरत के मुताबिक, नीतिगत प्रतिक्रिया की जरूरत होगी।
भारतीय रेलवे ने देश की इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास में अपनी अहम भूमिका फिर से साबित कर दी है। मार्च 2025 तक देश का रेल नेटवर्क 69,439 किलोमीटर तक फैल चुका है और अक्टूबर 2025 तक इसकी 99.1 प्रतिशत लाइनें इलेक्ट्रिफाइड हो चुकी हैं।
सरकार को रेवेन्यू या कमाई के तौर पर कई स्रोतों से पैसे आते हैं, जिसमें सबसे ज्यादा इनकम सरकारी उधारी और अन्य वित्तीय देनदारियों से होती है। लेकिन जब खर्च की बारी आती है तो सबसे ज्यादा खर्च राज्यों के टैक्स और शुल्क की हिस्सेदारी देने में होता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में रखे गए इस दस्तावेज में साफ किया गया है कि भारत अब केवल ‘स्वदेशी’ सोच तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था को एक रणनीतिक अनिवार्यता के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। आइए जानें इकोनॉमिक सर्वे 2026 की 5 बड़ी बातें।
इकोनॉमिक सर्वे 2026 के मुताबिक, केंद्र सरकार की स्कीम PMAY-U के तहत अब तक 96 लाख से ज्यादा घर पूरे होकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। यह आंकड़ा न केवल सरकार की आवास नीति की सफलता को दर्शाता है, बल्कि देश में बढ़ती अफोर्डेबल हाउसिंग की मांग का भी साफ संकेत देता है।
यूनियन बजट से ठीक पहले देश की अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा बताने वाला इकोनॉमिक सर्वे 2026 आज संसद के पटल पर रखा गया। आर्थिक सर्वे के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत से अधिक रहने की संभावना जताई गई है।
इकोनॉमिक सर्वे वह रिपोर्ट है, जो देश की आर्थिक सेहत का एक्स-रे करती है और बताती है कि भारत की ग्रोथ कितनी मजबूत है, महंगाई किस दिशा में जा रही है और आने वाले बजट में सरकार किन सेक्टर्स पर दांव लगा सकती है। इकोनॉमिक सर्वे 2026 आज पेश किया जा रहा है।
भारत का आर्थिक सर्वेक्षण एक तरह से अर्थव्यवस्था की स्थिति का सालाना रिपोर्ट कार्ड है। इसमें सरकार की आर्थिक नीतियों का आकलन होता है। आगे के सुधारों के सुझाव दिए जाते हैं।
गवर्नर ये स्पष्ट किया कि आगे चलकर वृद्धि की रफ्तार कुछ नरम पड़ेगी और महंगाई बढ़कर आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब पहुंचेगी।
समीक्षा में सैपियन लैब्स सेंटर फॉर ह्यूमन ब्रेन एंड माइंड की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा गया, ''कहा गया कि डेस्क पर लंबा समय बिताना कर्मचारी के मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और जो व्यक्ति डेस्क पर रोजाना 12 या इससे ज्यादा समय बिताता है, उसे मेंटल हेल्थ से जुड़ी दिक्कतों से जूझना पड़ता है।''
शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 740.76 अंकों (0.97%) की बढ़त के साथ 77,500.57 अंकों पर बंद हुआ। जबकि, एनएसई का निफ्टी 50 भी 258.90 अंकों (1.11%) की तेजी के साथ 23,508.40 अंकों पर बंद हुआ। बताते चलें कि शेयर बाजार ने कल गुरुवार को भी हरे निशान में कारोबार बंद किया था।
अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले भारतीय रुपये लंबे समय से फिसलता नजर आ रहा है। इसका असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है।
NPS और APY जैसी प्रमुख सरकारी पेंशन योजनाओं के आने से चालू वित्त वर्ष में देश के पेंशन सेक्टर में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। शुक्रवार को पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, भारतीय पेंशन सेक्टर में कुल अंशधारकों की संख्या में सितंबर, 2024 तक सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की बंपर बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आर्थिक सर्वेक्षण वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार की देखरेख में तैयार किया जाता है। वित्त मंत्री 1 फरवरी को आम बजट भी पेश करने वाली हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में देश का इकोनॉमिक सर्वे पेश करेंगी। यह वित्त वर्ष 2024-25 की आर्थिक समीक्षा होगी, जो देश की आर्थिक स्थिति का लेखा-जोखा पेश करेगी।
साल 1991 में भारत को एक आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। यह बाहरी ऋण से संबंधित था। सरकार विदेशों से लिए गए अपने ऋणों का भुगतान करने में सक्षम नहीं थी। विदेशी मुद्रा भंडार, जिसे हम पेट्रोलियम और दूसरी महत्वपूर्ण वस्तुओं के आयात के लिए बनाए रखते हैं, गिरकर ऐसे स्तर पर आ गया जो एक पखवाड़े तक भी नहीं चल सकता था।
भारत के पास ‘चीन प्लस वन’ रणनीति से लाभ उठाने के लिए दो विकल्प हैं। या तो वह चीन की आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हो जाए या फिर चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा दे।
आर्थिक सर्वे के मुताबिक, इक्विटी नकदी खंड कारोबार में खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 में 35.9 प्रतिशत थी।
भारत ने पिछले साल पर्यटन से 2.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा अर्जित की हैं, जो 65.7 प्रतिशत की सालाना वृद्धि है। पर्यटन क्षेत्र में रोजगार को संगठित बनाने के लिए पर्यटन मंत्रालय ने अतुल्य भारत पर्यटन सुविधा प्रदाता प्रमाणपत्र कार्यक्रम शुरू किया है।
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