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पंजाब चुनाव से पहले साथ आएंगे BJP-SAD? बीजेपी को मिल सकती है 'बड़े भाई' की भूमिका

 Written By: Malaika Imam
 Published : Aug 25, 2026 08:53 pm IST,  Updated : Aug 25, 2026 08:56 pm IST

BJP और SAD, दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंचने की खबर है। चर्चा ये भी है कि इस बार BJP गठबंधन में 'बड़े भाई' की भूमिका में नजर आ सकती है।

शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल- India TV Hindi
शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल Image Source : PTI

पंजाब की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच गठबंधन की वापसी को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंचने की खबर है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार गठबंधन में BJP बड़े भाई यानी वरिष्ठ सहयोगी की भूमिका में नजर आ सकती है।

सूत्रों के अनुसार, दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। गठबंधन की संभावनाओं के बीच SAD ने कथित तौर पर अपने नेताओं को ग्रामीण इलाकों की विधानसभा सीटों पर तैयारी नहीं करने की सलाह दी है। इसे सीट बंटवारे के संभावित फॉर्मूले से जोड़कर देखा जा रहा है।

BJP ने सभी 117 सीटों पर शुरू की तैयारी

वहीं, BJP ने पंजाब में अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। हाल ही में पंजाब दौरे पर पहुंचे BJP के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने पार्टी नेताओं को राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर तैयारी करने के निर्देश दिए। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि उन्होंने अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया।

BJP के सभी 117 सीटों पर तैयारी करने और SAD के ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सक्रियता सीमित करने की खबरों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आगामी चुनाव में BJP गठबंधन के भीतर पहले से कहीं ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।

पहली बार BJP हो सकती है गठबंधन में 'बड़े भाई'?

अगर यह समझौता इसी फॉर्मूले पर होता है, तो पंजाब की राजनीति में यह एक ऐतिहासिक बदलाव होगा। लंबे समय तक SAD गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में रहा है, जबकि BJP मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों की अपेक्षाकृत कम सीटों पर चुनाव लड़ती थी। पहली बार BJP वरिष्ठ सहयोगी के तौर पर गठबंधन का नेतृत्व करती नजर आ सकती है।

2020 में कृषि कानूनों पर टूटा था दशकों पुराना साथ

गौरतलब है कि BJP और SAD लंबे समय तक पंजाब में प्रमुख राजनीतिक सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों के बीच 2020 में केंद्र के कृषि कानूनों को लेकर मतभेद बढ़े और SAD ने NDA से अलग होने का फैसला किया। बाद में वे कृषि कानून वापस ले लिए गए।

अब दोनों दलों के बीच संभावित दोबारा गठबंधन से 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी तस्वीर बदल सकती है। BJP और SAD की नजदीकी से आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और अन्य दलों के सामने भी नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। (ANI इनपुट)

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