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कोटा और भीलवाड़ा के बाद अलवर में दो प्रसूताओं की मौत, एक का झोलाछाप डॉक्टर ने किया था इलाज

 Published : Aug 02, 2026 12:46 pm IST,  Updated : Aug 02, 2026 12:46 pm IST

राजस्थान के अलग-अलग शहरों में पिछले कुछ महीनों में गर्भवती महिलाओं की मौत के कई मामले सामने आए हैं। मौत की वजहों की जांच भी हुई है, लेकिन अभी भी मौत का सिलसिला जारी है।

Govindgarh Death- India TV Hindi
गोविंदगढ़ अस्पताल में दो महिलाओं की मौत Image Source : REPORTER INPUT

राजस्थान में कोटा और भीलवाड़ा के बाद अलवर में भी गर्भवती महिलाओं की मौत के दो मामले सामने आए हैं। गोविंदगढ़ में दो महिलाओं की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक मामले में परिजनों ने उपचार और रेफरल व्यवस्था में लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि दूसरे मामले में कथित झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद गर्भवती की मौत होने का मामला सामने आया है।

इससे पहले कोटा और भीलवाड़ा में कई महिलाओं की मौत हुई थी। अधिकतर मामलों में सिजेरियन डिलिवरी के बाद महिलाओं की मौत हुई थी। इस दौरान भी गलत ऑपरेशन करने और प्रोटोकॉल फॉलो न करने के आरोप लगे थे।

ब्लीडिंग से रचना की मौत

ग्राम कैमासा निवासी 26 वर्षीय रचना को पेट दर्द और अधिक ब्लीडिंग होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोविंदगढ़ लाया गया। यहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों का आरोप है कि 108 एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने पर निजी एंबुलेंस से उन्हें सरकारी अस्पताल के बजाय निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां से दोबारा रेफर करने के बाद अलवर और फिर जयपुर में उपचार चला, जहां अधिक ब्लीडिंग के कारण उनकी मौत हो गई। गुरुवार को शव गांव पहुंचने पर अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों ने समय पर उपचार नहीं मिलने, डीएनसी किए जाने तथा रेफरल प्रक्रिया में लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

पथरी के दर्द का इंजेक्शन लगाने के बाद मौत

दूसरा मामला आगराकी गांव का है। यहां 28 वर्षीय माफिया की मौत हो गई, जो आठ माह की गर्भवती थी। परिजनों का आरोप है कि महिला को आयरन के इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी गई थी, लेकिन न्याणा स्थित एक कथित झोलाछाप ने पथरी के दर्द का इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। इन दोनों घटनाओं ने गर्भवती महिलाओं को समय पर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। कोटा जैसी घटनाओं के बाद भी यदि रेफरल व्यवस्था, एंबुलेंस सेवा और अवैध चिकित्सकों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है, तो यह प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है।

मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में

कैमासा की गर्भवती महिला की मौत के बाद खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने संबंधित चिकित्सकों, एएनएम और नर्सिंग स्टाफ को समस्त रिकॉर्ड सहित आरसीएचओ कार्यालय, अलवर में तलब किया है। विभागीय आदेश में निर्धारित समय पर उपस्थित होकर पूरे मामले का रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

तीन माह पहले सील, फिर भी चलता रहा क्लीनिक

परिजनों का आरोप है कि जिस कथित झोलाछाप के यहां महिला को इंजेक्शन लगाया गया, उसके क्लीनिक पर करीब तीन माह पहले बीसीएमएचओ ने कार्रवाई कर सील लगाया था। इसके बावजूद क्लीनिक दोबारा संचालित होता रहा। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करेगा।

(अलवर से नेहा की रिपोर्ट)

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