1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. Amla Navami 2025: आंवला नवमी 30 या 31 अक्टूबर? इस दिन से शुरू हुआ था सतयुग, जानिए इसका धार्मिक महत्व

Amla Navami 2025: आंवला नवमी 30 या 31 अक्टूबर? इस दिन से शुरू हुआ था सतयुग, जानिए इसका धार्मिक महत्व

 Written By: Acharya Indu Prakash Edited By: Laveena Sharma
 Published : Oct 28, 2025 08:15 am IST,  Updated : Oct 28, 2025 08:16 am IST

Amla Navami Kab Hai 2025: आंवला नवमी का त्योहार कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। कहते हैं इसी दिन से सतयुग की शुरुआत भी हुई थी। इस पर्व को अक्षय नवमी भी कहा जाता है। यहां हम आपको बताएंगे इस साल आंवला नवमी कब मनाई जाएगी और इसका महत्व क्या है।

amla navami- India TV Hindi
आंवला नवमी कब है 2025 Image Source : INDIA TV

Amla Navami Kab Hai 2025: दिवाली के ठीक 10 दिन बाद मनायी जाने वाली अक्षय नवमी (Akshaya Navami 2025) का शास्त्रों में बहुत महत्व बताया गया है। पुराणों में इस दिन से ही सतयुग की शुरुआत मानी जाती है। अक्षय का अर्थ होता है- जिसका क्षरण न हो। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन किए गए कार्यों का अक्षय फल प्राप्त होता है। इसे इच्छा नवमी, आंवला नवमी, कूष्मांड नवमी, आरोग्य नवमी और धातृ नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन किये गये व्रत के पुण्य से सुख-शांति, सद्भाव और वंश वृद्धि का फल प्राप्त होता है। आंवला नवमी के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा-अर्चना करने का विधान है। 

आंवला नवमी कब है 2025 (Amla Navami Kab Hai 2025)

  • अक्षय नवमी - 31 अक्टूबर 2025, शुक्रवार
  • अक्षय नवमी पूर्वाह्न समय - 06:32 AM से 10:03 AM
  • नवमी तिथि प्रारम्भ - 30 अक्टूबर 2025 को 10:06 AM बजे
  • नवमी तिथि समाप्त - 31 अक्टूबर 2025 को 10:03 AM बजे

आंवला नवमी का महत्व (Amla Navami Ka Mahatva)

आंवला नवमी पर तर्पण और स्नान-दान का भी बहुत महत्व है। संभव हो तो इस दिन किसी तीर्थ स्थल पर जाकर स्नान करना चाहिए, लेकिन अगर आप कहीं दूर नहीं जा सकते, तो घर पर ही अपने नहाने के पानी में थोड़ा-सा गंगाजल डालकर स्नान जरूर कीजिये। इससे आपको अक्षय फलों की प्राप्ति होगी। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि अक्षय नवमी के दिन श्री विष्णु द्वारा कूष्माण्ड नामक दैत्य का अत्याचार समाप्त किया गया था, जिसके बाद उस दैत्य के रोम से कूष्माण्ड की बेल निकली थी। इसलिए इसे कूष्माण्ड नवमी भी कहते हैं। कूष्माण्ड को आम भाषा में पेठा या कद्दू कहते हैं, जिसकी सब्जी बनाई जाती है। ऐसे में इस दिन कुष्माण्ड, यानि पेठे का दान करना चाहिए। दान के साथ ही गन्ध, पुष्प और अक्षत आदि से कुष्माण्ड का पूजन भी करना चाहिये। इससे उत्तम फलों की प्राप्ति होती है। कूष्माण्ड नवमी के अलावा उड़ीसा में इस दिन जगतधात्री माता की पूजा भी की जाती है। जगतधात्री, मां दुर्गा का ही एक स्वरूप हैं। अक्षय नवमी के दिन से मथुरा प्रदक्षिणा, यानि मथुरा की परिक्रमा भी शुरू हो जाती है। 

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)

यह भी पढ़ें:

Gopashtami 2025 Date: गोपाष्टमी कब है 29 या 30 अक्टूबर, जानिए क्यों मनाया जाता है ये त्योहार और इस दिन किन उपायों को करने से चमक जाएगी आपकी किस्मत

Shani Margi 2025: शनि की कृपा से 2026 में पलटेगी इन राशियों की तकदीर, अपार धन-संपत्ति के बनेंगे मालिक

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Festivals से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें धर्म