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अनंत चतुर्दशी व्रत नियम: नमक से लेकर अनंत सूत्र तक, जानें व्रत में किन बातों का रखें ध्यान

 Written By: Arti Azad
 Published : Sep 24, 2026 12:08 pm IST,  Updated : Sep 24, 2026 12:08 pm IST

अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित है। इस दिन श्रीहरि के अनंत स्वरूप की आराधना की जाती है। इसके साथ ही अनंत डोरा बांधने की भी परंपरा है। जानिए इस व्रत के दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए।

anant chaturdashi vrat niyam, अनंत चतुर्दशी व्रत के नियम- India TV Hindi
अनंत चतुर्दशी व्रत में किन बातों का रखें ध्यान Image Source : MAGNIFIC/CANVA

अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को यह पर्व पर मनाया जाता है। पूजा के बाद कलाई पर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है। इसी दिन दस दिवसीय गणेशोत्सव का भी समापन होता है और गणपति बप्पा को विधि-विधान से विदाई दी जाती है। ऐसे में इस दिन पूजा और व्रत से जुड़े कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। तो चलिए जानते हैं अनंत चतुर्दशी व्रत के नियम क्या हैं। 

भगवान विष्णु के 'अनंत' स्वरूप​ की पूजा

अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु के 'अनंत' स्वरूप को समर्पित है। 'अनंत' का अर्थ है जिसका कोई अंत नहीं है, यानी जो शाश्वत और अनादि है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रीहरि की पूजा उनके शेषनाग स्वरूप से जुड़े रूप में की जाती है।

14 गांठों वाला सूत्र

पूजा के बाद रेशम या सूती धागे से बने अनंत सूत्र को कलाई पर धारण किया जाता है। इसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। मान्यता है कि ये गांठें ब्रह्मांड के 14 लोकों का प्रतीक हैं। इनमें सात ऊर्ध्व लोक- भूलोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक बताए गए हैं। वहीं, सात अधोलोक- अतल, वितल, सुतल, रसातल, तलातल, महातल और पाताल माने गए हैं।

अनंत चतुर्दशी व्रत नियम

  1. नमक से करें परहेज: अनंत चतुर्दशी के व्रत में नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रती फलाहार कर सकते हैं। 
  2. सात्विक भोजन: इस दिन घर में तामसिक भोजन बनाने से बचना चाहिए। परिवार के सभी सदस्यों को भी सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है। व्रत के दौरान खान-पान के साथ मन की शुद्धता का भी ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।
  3. क्रोध और विवाद से बचें: व्रत के दौरान नकारात्मक विचारों से दूर रहें। किसी से विवाद या क्रोध करने से बचना चाहिए। पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करने और सकारात्मक विचार बनाए रखने की परंपरा है। इस दौरान श्रीहरि के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।
  4. व्रत का पारण: शाम की पूजा पूरी होने के बाद मीठी पूड़ी, खीर या फल जैसे बिना नमक वाले सात्विक भोजन से व्रत का पारण किया जा सकता है।
  5. कब तक बांधे रखे अनंत डोरा: अनंत सूत्र को कम से कम 14 दिनों तक या अगले साल की अनंत चतुर्दशी तक धारण करने की मान्यता है। पुरुष इसे दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं। साथ ही व्रत के दिन शयन करने से बचने की धार्मिक मान्यता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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