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Jitiya Vrat Katha In Hindi Pdf: जीवित्पुत्रिका या जितिया व्रत की कथा

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Sep 13, 2025 10:46 am IST,  Updated : Oct 02, 2026 03:01 pm IST

Jitiya Vrat Katha In Hindi Pdf: जितिया पर्व में कथा पढ़ना बेहद जरूरी माना जाता है। कहते हैं कथा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।

Jitiya Vrat Katha- India TV Hindi
जितिया व्रत कथा Image Source : FREEPIK

Jitiya Vrat Katha In Hindi Pdf: इस साल जितिया व्रत 14 सितंबर 2025 को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो कोई भी महिला जीवित्पुत्रिका व्रत या जितिया व्रत करती है उसकी संतान पर कभी कोई बड़ा संकट नहीं आता। साथ ही संतान का जीवन सुख से भर जाता है। ये व्रत निर्जला रखा जाता है यानि इस व्रत में अन्न-जल कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता। इस पूजा में महिलाएं कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा की पूजा करती हैं। साथ ही मिट्टी और गाय के गोबर से चील और सियारिन की मूर्ति बनाती हैं। फिर शुभ मुहूर्त में विधि विधान पूजा करके जितिया की कथा सुनती हैं। चलिए जानते हैं जितिया व्रत में कौन सी कथा पढ़ी जाती है।

जितिया व्रत कथा pdf (Jitiya Vrat Katha Chilo Siyaro)

जितिया की पौराणिक कथा अनुसार किसी वन में एक चील और सियारिन रहती थी। दोनों में गहरी दोस्ती थी और वे हर काम को मिल-बांट के किया करती थीं। एक बार कुछ महिलाएं जंगल में आई जो जीवित्पुत्रिका व्रत की आपस में बात कर रही थीं। चील के मन में इस व्रत के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। वह महिलाओं के पास गई और उनसें व्रत के बारे में पूछने लगी। महिलाओं ने जितिया व्रत के विधान के बारे में चील को सारी जानकारी दी।

चील ने जाकर इस व्रत के बारे में अपनी मित्र सियारिन को बताया। जिसके बाद दोनों ने जितिया माता का व्रत और पूजन करने का निर्णय लिया। चील तथा सियारिन ने जितिया माता का व्रत का संकल्प लिया और शाम को पूजा की। लेकिन पूजा के बाद ही चील और सियारिन को भूख लगने लगी।

सियारिन को भूख बर्दास्त नहीं हुई और वह जंगल में शिकार करने चली गई। सियारिन जब मांस को खा रही थी, तब चील ने उसे देख लिया और उसने सियारिन की बहुत डांट लगाई। चील ने ये व्रत पूरी विधि से पूर्ण किया। फिर अगले जन्म में सियारिन और चील का जन्म बहन के रूप में, एक प्रतापी राजा के यहां हुआ। सियारिन का विवाह एक राजकुमार से हुआ और चील का विवाह राज्य मंत्री के पुत्र से हुआ।

कुछ समय बीता तो सियारिन ने एक पुत्र को जन्म दिया लेकिन जन्म के कुछ दिन बाद ही उसके पुत्र की मृत्यु हो गई। इसके बाद चील ने भी एक पुत्र को जन्म दिया, जो जीवित तथा स्वास्थ्य रहा। यह देख सियारिन को अपनी बहन चील से ईर्ष्या होने लगी।

जलन में आकर सियारिन ने अपने बहन के पुत्र और पति को मरवाने की कोशिश की, परंतु दोनों ही बच गए। एक दिन देवी मां सियारिन के सपने में आई और उन्होंने सियारिन से कहा “यह तुम्हारे पूर्व जन्म के कर्म का फल है, अगर तुम अपनी परिस्थिति ठीक करना चाहती हो तो मां जीतिया की व्रत और उपासना करो।

प्रातः काल उठकर इस सपने के बारे में सियारिन ने अपने पति को बताया। सियारिन के पति ने यह सुन सियारिन को ये व्रत करने के लिए कहा और उसकी बहन चील से माफी मांगने को बोला। इसके बाद सियारिन चील के घर गई और उससे अपने गलतियों की माफी मांगी। सियारिन को उसकी गलतियों पर पछतावा देखकर चील ने उसे माफ कर दिया।

अगले साल जब जितिया व्रत पड़ा तो ये व्रत सियारिन और उसकी बहन चील दोनों ने एक साथ रखा। माता जितिया ने प्रसन्न होकर सियारिन को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। कुछ दिनों बाद ही सियारिन ने एक सुंदर बालक को जन्म दिया। इसके बाद दोनों बहन प्रेम भाव से खुशी-खुशी रहने लगी।   

जितिया व्रत की दूसरी कथा (Jitiya Ki Kahani)

जितिया व्रत की एक कथा महाभारत काल से जुड़ी है। कहते हैं महाभारत युद्ध में अपने पिता गुरु द्रोणाचार्य की मृत्यु का बदला लेने के लिए अश्वत्थामा पांडवों के शिविर में घुस गया। उसने शिविर के अंदर पांच लोग को सोया पाए, अश्वत्थामा ने उन पांच लोगों को पांच पांडव समझकर मार दिया, परंतु वे द्रोपदी और पांडवों की पांच संतानें थीं। उसके उपरांत अुर्जन ने अश्वत्थामा की दिव्य मणि उसके माथे से निकाल ली।

अश्वत्थामा ने बदला लेने के लिए अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे को मारने की कोशिश की। जिसके लिए उसने उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मास्त्र से वार किया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा की अजन्मी संतान को फिर से जीवित कर दिया। पुनः जीवित होने के कारण उसका नाम जीवित पुत्र पड़ा।

चूंकि श्री कृष्ण ने उत्तरा की भी रक्षा की थी इसी कारण से वह जीवितपुत्रिका कहलाईं। ऐसी मान्यता है कि इस घटना के बाद से ही जीवितपुत्रिका या जितिया व्रत का आरंभ हुआ।

Jitiya Vrat Katha Pdf Download

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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