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Maa Mahagauri Ki Katha: मां महागौरी की कथा के बिना अधूरी रह जाएगी अष्टमी की पूजा, नवरात्रि के आठवें दिन जरूर करें इसका पाठ

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Mar 25, 2026 04:55 pm IST,  Updated : Mar 25, 2026 04:55 pm IST

Maa Mahagauri Ki Katha: चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन यानि 26 मार्च 2026 को माता महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन पूजा के दौरान आपको माता महागौरी की कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए, तभी आपकी पूजा पूर्ण मानी जाती है। आइए ऐसे में जान लेते हैं महागौरी माता की कथा के बारे में।

Mata Mahagauri Vrat Katha- India TV Hindi
माता महागौरी व्रत कथा Image Source : CANVA

Maa Mahagauri Ki Katha: चैत्र नवरात्रि 2026 में अष्टमी तिथि की पूजा 26 मार्च के दिन की जाएगी। इस दिन माता महागौरी की पूजा करने का विधान है। गौरवर्णा माता महागौरी की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और रोग-दोष से मुक्ति मिलती है। नवरात्रि के आठवें दिन कई लोग माता महागौरी की पूजा के साथ ही कन्या पूजन भी करते हैं। नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर माता महागौरी की पूजा के साथ ही व्रत कथा का पाठ करना भी बेहद आवश्यक होता है। महाअष्टमी के दिन व्रत कथा का पाठ किए बिना पूजा अधूरी रह जाती है। आइए ऐसे में जान लेते हैं देवी महागौरी की व्रत कथा के बारे में। 

माता महागौरी की व्रत कथा (Maa Mahagauri Vrat Katha)

माता महागौरी को धर्म और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के आठवें दिन पूजा के साथ माता की व्रत कथा का पाठ आपको करना चाहिए। माता महागौरी से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए देवी पार्वती ने कठोर तपस्या की थी। माता ने भगवान शिव को पाने के लिए अन्न और जल तक का त्याग भी कर दिया था। माता की इस कठोर तपस्या के कारण वक्त के साथ-साथ उनका गौर वर्ण भी काला पड़ने लगा। माता का यह कठोर तप वर्षों तक चला और अंत में प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए। माता के तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

माता को वरदान देने के साथ ही भगवान शिव ने अपनी जटाओं में स्थित गंगा के पवित्र जल से माता पार्वती को स्नान करवाया। गंगा के पवित्र जल से स्नान करके माता का रूप कांतिमय और श्वेत हो गया। माता के कठोर तप और श्वेत वर्ण की रोशनी चारों दिशाों में फैलने लगी। मां पार्वती के इस कांतिमय और ओजस्वी स्वरूप को ही माता महागौरी कहा जाता है। नवरात्रि के आठवें देवी देवी महागौरी की इस कथा का पाठ करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें आत्मिक ज्ञान और शक्ति की प्राप्ति होती है। 

मां महागौरी की पूजा के बाद करें नीचे दी गई आरती का पाठ 

जय महागौरी जगत की माया। 

जय उमा भवानी जय महामाया॥
हरिद्वार कनखल के पासा। 
महागौरी तेरा वहा निवास॥
चन्द्रकली और ममता अम्बे। 
जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे॥
भीमा देवी विमला माता। 
कौशिक देवी जग विख्यता॥
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। 
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती (सत) हवन कुंड में था जलाया। 
उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। 
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
तभी मां ने महागौरी नाम पाया। 
शरण आने वाले का संकट मिटाया॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता। 
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। 
महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥

 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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