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रुद्राभिषेक के बाद हवन अनिवार्य है या नहीं? जानिए क्या कहते हैं शास्त्र और विद्वान

 Published : Aug 03, 2026 02:38 pm IST,  Updated : Aug 03, 2026 02:41 pm IST

जब भी हम रुद्राभिषेक कराने जाते हैं तो एक सवाल हर किसी के मन में आता है और वो ये है कि क्या हमें रुद्राभिषेक के बाद हवन कराना चाहिए या नहीं? अक्सर लोग इसे लेकर काफी कन्फ्यूजन में रहते हैं। आज हम आपकी इसी दुविधा को दूर करेंगे और बताएंगे कि इस बारे में हमारे शास्त्र क्या कहते हैं।

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रुद्राभिषेक के बाद हवन कराना चाहिए या नहीं? Image Source : INDIA TV

रुद्राभिषेक भगवान शिव की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावी अनुष्ठान है। वैसे तो ये पवित्र अनुष्ठान कभी भी कराया जा सकता है, लेकिन सावन में इसका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। दरअसल सावन शिव का महीना है और इस महीने में शिवलिंग का अभिषेक करना सर्वोत्तम माना जाता है। इसी वजह से ज्यादातर श्रद्धालु सावन में रुद्राभिषेक जरूर कराते हैं। बता दें वैदिक मंत्रों के साथ शिवलिंग पर विशेष द्रव्यों को अर्पित करने की प्रक्रिया को ही रुद्राभिषेक कहते हैं। रुद्राभिषेक आप अपनी श्रद्धानुसार जल, दूध, घी, पंचामृत, गन्ने के रस या सरसों के तेल किसी भी चीज से करा सकते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या रुद्राभिषेक के बाद हवन कराना अनिवार्य होता है? इस बारे में गोरखपुर के प्रख्यात पंडित सुजीत जी महाराज ने कुछ ऐसी बातें बताई हैं जिससे आपकी सारी कन्फ्यूजन दूर हो जाएगी।

रुद्राभिषेक के बाद हवन कराना चाहिए या नहीं?

पंडित सुजीत जी महाराज अनुसार, शास्त्रों में कहीं भी रुद्राभिषेक के बाद हवन कराने का वर्णन नहीं किया गया है। यहां तक की शिव पुराण में भी ऐसा कोई नियम नहीं बताया गया है। भगवान शिव के प्रमुख मंदिरों जैसे काशी विश्वनाथ में भी रुद्राभिषेक के बाद हवन नहीं किया जाता है। इससे ये स्पष्ट होता है कि रुद्राभिषेक के बाद हवन करना बिल्कुल भी जरूरी नहीं है। रुद्राभिषेक अपने आप में एक पूर्ण अनुष्ठान है जिसका मतलब है कि हमें प्रकृति ने जो भी चीजें दी हैं उसे शिवलिंग पर या भगवान शिव को हम अर्पित कर रहे हैं। रुद्राभिषेक कराने के लिए सावन शिवरात्रि का दिन सबसे शुभ माना जाता है।

हवन कब किया जाता है?

  • यदि आप विशेष कामना या बड़े अनुष्ठान के तहत पूजा कर रहे हैं, तो हवन करना उत्तम और फलदायी माना जाता है।
  • महामृत्युंजय जाप, गायत्री मंत्र या किसी भी मूल मंत्र का संकल्पित जाप पूरा होने के बाद हवन करना अनिवार्य होता है।
  • कुंडली के अशुभ ग्रह दोषों की शांति के लिए किया जाने वाला हवन आवश्यक होता है।
  • विवाह संस्कार, उपनयन, नामकरण, अन्नप्राशन, मुंडन के समय हवन के बिना संस्कार प्रक्रिया पूर्ण नहीं मानी जाती।

रुद्राभिषेक के बाद हवन न कराने से नहीं लगेगा कोई दोष

शास्त्रों अनुसार रुद्राभिषेक में शिवलिंग को स्नान कराने और मंत्रों के जाप का ही मुख्य विधान होता है, इसलिए इस अनुष्ठान के बाद हवन करना जरूरी नहीं होता। लेकिन यदि किसी विशेष संकल्प, जैसे रुद्रयाग या महायज्ञ का आयोजन हो, तब हवन जरूर किया जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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