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राधा अष्टमी की पूजा कैसे की जाती है? स्टेप-बाय-स्टेप जानें पूरी पूजा विधि और भोग

 Written By: Arti Azad
 Published : Sep 18, 2026 11:23 am IST,  Updated : Sep 18, 2026 11:23 am IST

राधा अष्टमी पर राधारानी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से राधा-कृष्ण की पूजा करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूजा के दौरान राधारानी का अभिषेक, श्रृंगार, भोग और आरती जैसे कई चरण होते हैं। ऐसे में स्टेप-बाय-स्टेप जानें पूरी पूजा विधि।

Radha Ashtami Puja Vidhi, राधा अष्टमी की पूजा विधि,- India TV Hindi
राधा अष्टमी की पूजा विधि Image Source : PINTEREST

राधा अष्टमी का दिन ब्रज और राधा-कृष्ण के भक्तों के लिए बेहद खास है। शास्त्रों में राधारानी को भगवान श्रीकृष्ण की आत्मा और उनकी आह्लादिनी शक्ति कहा गया है। भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को राधारानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रत रखते हैं और राधा-कृष्ण की विधि-विधान से पूजा और भजन-कीर्तन करते हैं। अगर आप पहली बार राधा अष्टमी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो पूजा की सही विधि जानना जरूरी है। राधा-कृष्ण का अभिषेक, शृंगार, भोग तक की पूरी प्रक्रिया यहां आसान स्टेप्स में जानिए।

राधा अष्टमी 2026 कब है?

इस साल राधा अष्टमी का पर्व शनिवार, 19 सितंबर को मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर करीब 1 बजे शुरू होगी और 19 सितंबर को दोपहर लगभग 3 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगी। राधारानी की पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष माना जाता है। 19 सितंबर को पूजा का शुभ समय सुबह करीब 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक रहेगा। अलग-अलग स्थानों पर समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

पूजा की तैयारी करें

सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करने के बाद पूर्व या उत्तर दिशा में चौकी रखें। चौकी पर लाल, पीला या गुलाबी कपड़ा बिछाकर राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। राधारानी की अलग प्रतिमा न हो तो राधा-कृष्ण की तस्वीर से भी पूजा की जा सकती है।

व्रत का संकल्प लें

पूजा शुरू करने से पहले हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर राधा अष्टमी व्रत और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद एक कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें। अब राधा-कृष्ण को जल, वस्त्र, चंदन, रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।

अभिषेक और शृंगार

अगर राधा-कृष्ण की धातु की प्रतिमा है, तो जल और फिर पंचामृत से अभिषेक करें। तस्वीर होने पर अभिषेक न करें, बल्कि फूल और चंदन अर्पित करें। अभिषेक के बाद राधारानी और श्रीकृष्ण को नए वस्त्र पहनाएं और सुगंधित फूलों से शृंगार करें।

भोग लगाकर करें आरती

पूजा और राधारानी के शृंगार के बाद उन्हें सात्विक भोग अर्पित करें। भोग में खीर, मालपुआ, रबड़ी, माखन-मिश्री, फल, पंचामृत या दूध से बनी मिठाई रख सकते हैं। भोग हमेशा ताजा और घर का बना होना चाहिए। इसमें प्याज, लहसुन आदि सामग्री का इस्तेमाल न करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर राधा अष्टमी की कथा और मंत्र जप करें। इसके बाद राधा-कृष्ण की आरती करें। पूजा पूरी होने पर भगवान को अर्पित किया गया भोग प्रसाद के रूप में परिवार में बांटें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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