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सावन की दूर्वा गणेश चतुर्थी कब मनाई जाएगी? नोट कर लें पूजा का शुभ मुहूर्त

 Written By: Arti Azad
 Published : Aug 13, 2026 06:44 pm IST,  Updated : Aug 13, 2026 06:46 pm IST

सावन माह की गणेश चतुर्थी तिथि को दूर्वा गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन गणेश भगवान को दूर्वा अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। चलिए जानते हैं इस साल सावन की दूर्वा चतुर्थी तिथि कब है। गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त, दूर्वा चढ़ाने का महत्व भी जानिए।

Ganesh Chaturthi- India TV Hindi
सावन दूर्वा गणेश चतुर्थी 2026 Image Source : PINTEREST

सावन में शिव आराधना के साथ ही गणेश जी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को दूर्वा गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन गणपति को दूर्वा अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। जानिए सावन की दूर्वा गणेश चतुर्थी 2026 कब है और इस दिन शुभ मुहूर्त क्या-क्या रहेंगे। 
 
कब है दूर्वा गणेश चतुर्थी?
 
द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल चतुर्थी तिथि की शुरुआत 15 अगस्त 2026 को शाम 5 बजकर 28 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन 16 अगस्त की शाम 4 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर दूर्वा गणेश चतुर्थी का व्रत और पूजा 16 अगस्त को की जाएगी।
 
16 अगस्त 2026 के शुभ मुहूर्त
 
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:50 ए एम से 05:35 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 05:12 ए एम से 06:20 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:17 पी एम से 01:08 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:50 पी एम से 03:41 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 07:06 से 07:28 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या- 07:06 से 08:13 पी एम
  • अमृत काल- 091:44 से 11:22 पी एम
  • सर्वार्थ सिद्धि योग-06:20 ए एम से 03:50, ए एम, अगस्त 17
गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त
 
16 अगस्त को गणेश जी की पूजा के लिए सुबह 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर 1 बजकर 44 मिनट बजे तक का समय शुभ रहेगा। इस दौरान पूजा के लिए करीब 2 घंटे 38 मिनट का समय मिलेगा। भक्त इस अवधि में गणेश जी को दूर्वा, सिंदूर और भोग अर्पित कर सकते हैं।
 
चतुर्थी तिथि का महत्व
 
शिवमहापुराण में चतुर्थी तिथि पर गणेश जी की विधिपूर्वक पूजा करने का महत्व बताया गया है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति सुख और कल्याण की कामना से श्रद्धापूर्वक गणेश जी की आराधना करता है, उसे भगवान गणपति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
 
क्यों है बप्पा को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा?
 
पौराणिक कथा के अनुसार, अनलासुर नामक दैत्य के आतंक से सभी परेशान थे। गणेश जी ने उसका अंत करने के लिए उसे निगल लिया, लेकिन इससे उनके पेट में तेज जलन होने लगी। कई उपायों से राहत नहीं मिली। तब कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठें गणेश जी को दीं। दूर्वा ग्रहण करने के बाद उनकी जलन शांत हो गई। तभी से गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा मानी जाती है।
 
बच्चों से करवाएं पूजा
 
इस दिन बच्चों से गणेश जी की पूजा करवाना बेहद शुभ माना जाता है। उनसे 11 गांठ दूर्वा अर्पित कराएं और गणेश जी को सिंदूर चढ़ाकर लड्डू का भोग लगाएं। फिर बच्चे से "त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय। अनित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय॥" मंत्र का 11 बार जाप करवाएं। भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और एकाग्रता की कामना से यह उपाय करवाने की मान्यता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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