28 अगस्त 2026 तक सावन का पवित्रा महीना रहेगा। यह पूरा माह भगवान शिव की आराधना के लिए बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि सावन मास में शिवलिंग पर एक लोटा जल और कुछ बेलपत्र चढ़ाने मात्र से ही व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। भोलेनाथ को बेलपत्र अति प्रिय इसलिए सावन की पूजा में बेलपत्र जरूर रखें। लेकिन आपको बता दें कि बेलपत्र तोड़ने के कुछ नियम भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गलत समय या तिथि पर बेलपत्र तोड़ने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता और अनजाने में दोष भी लग सकता है। आइए जानते हैं बेलपत्र तोड़ने के सही नियम और चढ़ाने का तरीका।
इन तिथियों और दिनों में बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए
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सोमवार- भगवान शिव की पूजा के लिए सोमवार का दिन सबसे अधिक शुभ होता है लेकिन इस दिन बेलपत्र तोड़ना वर्जित होता है। पूजा के लिए एक दिन पहले यानी रविवार को ही बेलपत्र तोड़कर रख लें।
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वर्जित तिथियां- चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथि के दिन भी बेलपत्र तोड़ने की मनाही है।
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संक्रांति- संक्रांति के दिन भूलकर भी बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। इस दिन भी बेलपत्र को तोड़ना वर्जित माना गया है।
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शाम के समय- सूर्यास्त के बाद बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। इसके साथ ही शाम के समय बेलपत्र के पेड़ को भी स्पर्श न करें।
बेलपत्र तोड़ते समय इन बातों का रखें ध्यान
- बेलपत्र तोड़ने से पहले मन में भगवान शिव का ध्यान करें और पेड़ को प्रणाम कर के बेलपत्र तोड़ें।
- बेलपत्र तोड़ते समय ध्यान रखें कि पेड़ की टहनी या डाली न टूटें। बेल के पेड़ की पूरी टहनी कभी नहीं तोड़नी चाहिए वरना दोष लगता है। हमेशा पत्ते ही तोड़ने चाहिए।
- बेल के पेड़ को कभी नहीं काटना चाहिए, क्योंकि इससे व्यक्ति के जीवन में कई तरह की परेशानियां आ जाती हैं।
- भगवान शिव की पूजा में हमेशा वही बेलपत्र इस्तेमाल करें जिसमें तीन पत्ते एक साथ जुड़े हों। कटा-फटा या धारी वाला बेलपत्र शिवलिंग पर न चढ़ाएं।
शिवलिंग पर बेलपत्र कैसे चढ़ाना चाहिए?
शिवलिंग पर बेलपत्र हमेशा उल्टा कर के चढ़ाना चाहिए। बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि पत्ते का चिकना भाग शिवलिंग पर रहे। शिवलिंग पर 3 से लेकर 11 बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है लेकिन आप इससे अधिक बेल पत्र भी चढ़ा सकते हैं। वहीं अगर आपके पास बेलपत्र अधिक नहीं हैं तो आप एक ही बेलपत्र को पानी से धोकर बार-बार चढ़ा सकते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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