Thursday, January 22, 2026
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Kaal Bhairav Aarti: काल भैरव जयंती आज, करें 'जय भैरव देवा' की आरती; मिलेगी भय, रोग और शत्रु से मुक्ति

Kaal Bhairav Aarti Lyrics: भगवान शिव का एक रौद्र रूप है, जिससे स्वयं काल भी डरता है। आज, 12 नवंबर को शिव के उन्हीं रूप काल भैरव की जयंती मनाई जा रही है। इस दिन भगवान काल भैरव की विशेष पूजा-अर्चना, व्रत और आरती का महत्व बताया गया है। यहां पढ़िए आरती के हिंदी लिरिक्स

Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
Published : Nov 12, 2025 10:02 am IST, Updated : Nov 12, 2025 10:46 am IST
Bhairav Baba Aarti Lyrics- India TV Hindi
Image Source : CANVA काल भैरव देवा की आरती

Kaal Bhairav Aarti Hindi Lyrics: शिव जी को भोला कहा जाता है, क्योंकि उन्हें जल्दी और आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है। लेकिन वही रौद्र रूप धारण कर लें, तो स्वयं बह्मा भी मुश्किल में पड़ जाए। उनका ऐसा ही रौद्र रूप है काल भैरव। बाबा भैरव की जयंती हर साल मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है, जो इस साल आज 12 नवंबर को है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर काल भैरव की विधि-विधान से पूजा करते हैं। 

काल भैरव को लगाएं इन चीजों का भोग

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा काल भैरव को संहारक और धर्म रक्षक कहा गया है। जब भी अधर्म बढ़ता है, तो भगवान शिव की आज्ञा से काल भैरव दुष्ट शक्तियों का विनाश करते हैं। काल भैरव की जयंती पर काल भैरव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दौरान भगवान को इमरती, पान, मालपुआ, उड़द की दाल और काले तिल का भोग लगाने की परंपरा है। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

पूजा के बाद आरती करना बेहद शुभ माना गया है। आरती के समय घी या कपूर का दीपक जलाकर भगवान को अर्पित करें। मान्यता है कि इससे भय, रोग और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

काल भैरव की आरती

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा।

जय काली और गौरा देवी कृत सेवा।।
जय भैरव देवा

तुम्हीं पाप उद्धारक दु:ख सिंधु तारक।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक।।
जय भैरव देवा

वाहन शवन विराजत कर त्रिशूल धारी।
महीमा अमित तुम्हारी जय जय भयकारी।।
जय भैरव देवा

तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होंवे।
चौमुख दीपक दर्शन दु:ख सगरे खोंवे।।
जय भैरव देवा

तेल चटकि दधि मिश्रित भाषावलि तेरी।
कृपा करिये भैरव करिये नहीं देरी।।
जय भैरव देवा

पांव घुंघरु बाजत अरु डमरु डमकावत।
बटुकनाथ बन बालक जन मन हरषावत।।
जय भैरव देवा

बथुकनाथ की आरती जो कोई नर गावे।
कहें धरणी धर नर मनवांछित फल पावे।।
जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा।
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा।।
जय भैरव देवा

Kaal Bhairav Aarti Hindi Lyrics PDF

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