ज्योतिष में भावात भावम के सिद्धांत को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सिद्धांत ऋषि पराशर द्वारा प्रतिपादित किया गया था। इस सिद्धांत का सरल शब्दों में अर्थ है 'भाव से भाव'। इस सिद्धांत को लागू करके व्यक्ति के जीवन के हर पक्ष के बारे में विस्तार से पता चल सकता है। यह सिद्धांत क्या है आइए अब विस्तार से जानते हैं।
क्या है भावात भावम का सिद्धांत
ऋषि पराशर के अनुसार कुंडली के किसी भी भाव के बारे में पता करने के लिए न केवल उस भाव को देखना जरूरी है बल्कि उस भाव से उतनी ही संख्या आगे के भाव से भी संबंधित भाव के बारे पता चलता है। यानि चौथे भाव की नीचे दिए गए उदाहरणों के जरिए आप इसे आसानी से समझ सकते हैं।
उदाहरण 1- कुंडली के चतुर्थ भाव को सुख, भूमि-भवन और माता का भाव कहा जाता है। अब भावात भावम के सिद्धांत के अनुसार चतुर्थ भाव के फल की संपूर्ण जानकारी के लिए चौथे भाव से चार स्थान आगे के भाव यानि चतुर्थ से चतुर्थ को देखना भी जरूरी है। चौथे भाव से चौथा भाव होगा कुंडली का सातवां भाव। यानि सुख, माता और भूमि भवन की पूरी भविष्यवाणी चतुर्थ भाव और सप्तम भाव से की जाएगी।
उदाहरण 2- कुंडली के पंचम भाव को संतान, बुद्धि, प्रेम आदि का कारक माना जाता है। अब भावात भावम के सिद्धांत के अनुसार पंचम भाव के फल की संपूर्ण जानकारी के लिए पंचम भाव से पांचवें स्थान आगे के भाव यानि पंचम से पंचम को देखना भी जरूरी है। पंचम भाव से पांचवां भाव होगा कुंडली का नवम भाव। यानि संतान, बुद्धि, प्रेम जीवन आदि की पूरी भविष्यवाणी पंचम और नवम भाव से की जाएगी।
- इन उदाहरणों से आप समझ गए होंगे कि भावात भावाम का सिद्धांत कैसे काम करता है। भावात भावम सिद्धांत के अनुसार जिस भी भाव के बारे में आप जानकारी चाहते हैं उसकी संख्या के जितने आगे वाले भाव को देखकर भविष्यवाणी करने से सटीक परिणाम आपको प्राप्त हो सकते हैं।
- अगर कुंडली का कोई भाव पाप ग्रहों की चपेट में है या किसी भाव पर क्रूर ग्रहों की दृष्टि पड़ रही है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह भाव पूरी तरह से नकारात्मक हो गया। भावात भावम के नियम को ध्यान रखते हुए अगर कुंडली को देखा जाए तो पाप प्रभावित भाव भी शुभ परिणाम आपको दे सकता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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