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चौरचन पूजा 2026: जानें पूजन सामग्री, विधि, आरती, मंत्र, गीत और चांद पूजा का सटीक समय

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Sep 13, 2026 02:54 pm IST,  Updated : Sep 13, 2026 02:58 pm IST

चौरचन पूजा पर्व को मिथिला में चौथ चांद के नाम से भी जाना जाता है। इस बार यह पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया जा रहा है। यहां हम आपको बताएंगे चौरचन पूजा की विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती, भोग समेत हर एक जानकारी।

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चौरचन पूजा विधि और मुहूर्त Image Source : CANVA

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पूरे भारत में गणेश चतुर्थी के रूप में तो मिथिला में इसे चौरचन पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा इस पर्व को मिथिला में ही चौथ चांद, चौथ चंद्र और चारचन्ना पावनि के नाम से भी जाना जाता है। मान्यताओं अनुसार जो महिला यह व्रत रखती है उसके परिवार में सदैव सुख-समृद्धि बनी रहती है। कहते हैं इस व्रत को रखने से मिथ्या दोष व झूठे कलंक से भी रक्षा होती है। इस दिन आंगन या छत को साफ कर वहां अरिपन बनाई जाती है। श्रद्धालु इस व्रत में भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा करते हैं। यहां आप जानेंगे चौरचन पूजा की विधि, मुहूर्त, मंत्र, आरती समेत सारी जानकारी।

चौरचन पूजा का शुभ मुहूर्त 2026

चौरचन पूजा का शुभ मुहूर्त 14 सितंबर 2026 की शाम 5:54 बजे से रात 07:36 बजे तक रहेगा। 

चौरचन पूजा सामग्री

  • दूध, दही, तिल
  • सुपारी, चंदन
  • शुद्ध जल
  • शंख
  • खीर और मौसमी फल
  • सिंदूर
  • केले का पत्ता और आम का पत्ता
  • कलश
  • बांस का सूप
  • दीप, डाली
  • नया वस्त्र
  • गौर चावल का आटा
  • अष्टदल (अल्पना)
  • दूर्वा दल और बेलपत्र
  • सफेद फूल-माला
  • अक्षत

चौरचन पूजा विधि

  • चौरचन की पूजा शाम में चंद्रोदय के बाद होती है। 
  • घर की व्रती महिलाएं आंगन या छत पर यह पूजा संपन्न करती हैं।
  • इस पूजा के लिए आंगन या छत को साफ कर वहां अरिपन (चावल के आटे से बनी पारंपरिक अल्पना) बनाई जाती है।
  • फिर केले के पत्तों की मदद से गोलाकार चंद्रमा बनाया जाता है।
  • फिर बांस के बने सूप में फल, मिठाई, खीर, पूड़ी आदि पकवान रखे जाते हैं।
  • इसके बाद चंदन, दूर्वा, फल, फूल, मिठाई, खीर इत्यादि से भगवान गणेश की विधिवत् पूजा की जाती है।
  • उन्हें विभिन्न प्रकार के मीठे व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
  • इसके बाद चंद्रोदय होते ही व्रती महिलाएं सूप को हाथों में उठाकर चंद्रदेव को अर्घ्य देती है। इस बात का ध्यान रखें कि चंद्रमा की पूजा करते समय आपको सीधे चांद को नहीं देखना है। इस दिन अर्घ्य परोक्ष रूप से यानी जल में प्रतिबिंब या नजर नीची रखकर दिया जाता है।
  • चंद्र देव को दूध और जल से अर्घ्य अर्पित किया जाता है।
  • कई स्थानों पर घर के पुरुष सदस्य इस दिन मारर भांगना यानी मिट्टी के पात्र फोड़ने की रस्म निभाते हैं। 
  • पूजा के बाद परिवार में प्रसाद वितरण होता है और सभी लोग मिलकर भोजन करते हैं।
  • इस दिन महिलाएं बांस के बर्तनों में एक खास तरह की खीर तैयार करती हैं और इस खीर का भोग चंद्रदेव को लगाया जाता है।

चौरचन पूजा 2026 चांद पूजा समय

चौरचन पूजा के दिन चांद पूजा का समय शाम 5:54 बजे से रात 07:36 बजे तक रहेगा।

चौरचन पूजा आरती

ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।

दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।

चौरचन पूजा मंत्र

  • दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवम् नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणम्॥ (चंद्र देव की पूजा के समय परिवार का प्रत्येक व्यक्ति एक-एक फल हाथ में लेकर इस मंत्र को पढ़ते हुए चंद्र देव को प्रणाम करता है)
  • सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः।। (कहते हैं इस दिन इस मंत्र का जाप करते हुए चंद्र देव की पूजा करनी चाहिए। इससे चंद्रमा इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने का पाप नहीं लगता। 

चौरचन पूजा भोग

  • खीर (इस पर्व का मुख्य भोग है जिसे चावल या साबूदाने से तैयार किया जाता है)
  • पूड़ी
  • पिरुकिया (गुझिया)
  • खाजा-लड्डू
  • फल (केला, खीरा, शरीफा, संतरा)

ये सभी प्रसाद सामग्री ही बांस के सूप में सजाकर चंद्रदेव को अर्पित की जाती हैं।

चौरचन पूजा गीत

चौरचन के चंदा सुहान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान
घर अंगना हम नीक सं निपबै
घर अंगना हम नीक सं निपबै
पूजा के करबै ओरीयान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान
चौरचन के चंदा सुहान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान
छांछि मटकुरि में दही जमेबै
छांछि मटकुरि में दही जमेबै
डाली पर रखबै पकबान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान,
चौरचन के चंदा सुहान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान
केरा, नरियल मधुर मंगेबाई
केरा, नरियल मधुर मंगेबाई
सङ्गेह सुपारी आ पान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान,
चौरचन के चंदा सुहान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान
कल जोड़ी सब गोटे आशीष मंगबै
कल जोड़ी सब गोटे आशीष मंगबै
अंगना में आता भगवान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान,
चौरचन के चंदा सुहान गे बहिना
चौरचन के चंदा सुहान

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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