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Puja Mein Akshat Kyu Jaruri: पूजन-अनुष्ठान सामग्री में चावल का होना जरूरी, अक्षत के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है पूजा

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : May 13, 2026 07:01 pm IST,  Updated : May 13, 2026 07:01 pm IST

Puja Mein Akshat Kyu Jaruri: चावल को शुभता, समृद्धि और पूर्णता का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं में शुभ-मांगलिक कार्यों के दौरान देवी-देवताओं को अक्षत अर्पित करने से ही पूजा सफल मानी जाती है। आइए जानते हैं पूजा में अखंडित चावल के प्रयोग के पीछे क्या कारण बताए गए हैं।

Significance of Akshat- India TV Hindi
अक्षत के बिना क्यों अधूरी मानी जाती है पूजा Image Source : PEXELS

Puja Mein Akshat Kyu Jaruri: सनातन धर्म में पूजा-पाठ और अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना गया है। पूजा की हर सामग्री का अपना धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। जल, फूल, दीपक, चंदन और चावल आदि पूजा सामग्री अर्पित करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक हैं। इनमें चावल (अक्षत) का प्रयोग हर पूजा में किया जाता है। कहते हैं कि इसके बिना पूजा अपूर्ण है। क्या कभी आपने इस बारे में विचार किया है कि आखिर क्यों पूजा के संपूर्ण होने में अक्षत महत्वपूर्ण है। यहां जानिए क्यों चावल के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।

अक्षत का क्या होता है अर्थ?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अक्षत शब्द 'अ' और 'क्षत' से मिलकर बना है। इसका अर्थ होता है जो टूटा या खंडित न हो। यही कारण है कि पूजा में साबुत चावल का ही इस्तेमाल किया जाता है। अक्षत को अटूट आस्था, पूर्णता और भगवान के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

क्यों चढ़ाए जाते हैं चावल?
पूजा के दौरान देवी-देवताओं को तिलक लगाने के बाद चावल अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि इससे पूजा पूर्ण मानी जाती है और साधक को शुभ फल प्राप्त होता है। धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि अक्षत अर्पित करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक
चावल को शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। कई धार्मिक अनुष्ठानों और हवन में भी इसका उपयोग किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि चावल अर्पित करने से नकारात्मकता दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। इसके साथ ही परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

मां लक्ष्मी और अन्नपूर्णा से संबंध
हिंदू धर्म में चावल को अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा और धन की देवी मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। पूजा में अक्षत चढ़ाकर भक्त भगवान से घर में अन्न और धन की कभी कमी न होने की प्रार्थना करते हैं। इसी वजह से हर शुभ कार्य और मांगलिक अवसर पर चावल का विशेष महत्व होता है।

सामग्री की कमी पूरा करता है अक्षत
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अगर पूजा के समय कोई सामग्री उपलब्ध न हो तो उसकी जगह अक्षत अर्पित किए जा सकते हैं। ऐसा करने से पूजा में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती और ईश्वर भक्त की सच्ची भावना को स्वीकार करते हैं। यही वजह है कि चावल को हर पूजा की जरूरी सामग्री माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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