दसमुखी रुद्राक्ष को भगवान विष्णु के दस अवतारों और दस दिशाओं का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह रुद्राक्ष भगवान शिव के दसवें अश्रु से बना था। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो इस रुद्राक्ष के स्वामी ग्रह बुध हैं और अधिष्ठाता देवता विष्णु भगवान। बुध और भगवान विष्णु के प्रभाव के कारण ही इस रुद्राक्ष को धारण करने वाले को करियर और पारिवारिक जीवन में बेहद शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। आइए ऐसे में जान लेते हैं इस रुद्राक्ष को धारण करने की विधि और लाभ।
दसमुखी रुद्राक्ष को धारण करने की विधि
- दसमुखी रुद्राक्ष को आपको सोमवार के दिन धारण करना चाहिए।
- सोमवार की सुबह स्नान-ध्यान के बाद आपको रुद्राक्ष को स्टील, पीतल या चांदी के बर्तन में रखना चाहिए।
- इसके बाद रुद्राक्ष पर चंदन, इत्, तिल, रोली, अक्षत आदि आपको लगाने चाहिए।
- अब आपको 'ॐ ह्रीं नमः' मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। इस मंत्र का जप करने के बाद 'ॐ नमो विष्णवे वासुदेवाये' नम: मंत्र का भी कम से कम 11 बार जप करें।
- इसके बाद गंगाजल या गाय के दूध से रुद्राक्ष को शुद्ध कर दें।
- इसके बाद लाल या पीले धागे में इसे पिरोकर इस आप दाहिने हाथ या फिर गले में दारण कर सकते हैं।
दसमुखी रुद्राक्ष धारण करने के लाभ
इस रुद्राक्ष को धारण करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही आपको पारिवारिक जीवन में भी बेहद शुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। वंश वृद्धि के लिए भी यह रुद्राक्ष शुभ माना जाता है। करियर में चली आ रही परेशानियों का अंत भी दसमुखी रुद्राक्ष को धारण करने से हो सकता है, साथ ही पदोन्नति के भी योग बनते हैं। यह रुद्राक्ष आपको आर्थिक उन्नति दिलाने वाला भी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार जो लोग दसमुखी रुद्राक्ष धारण करते हैं उनके विरोधी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाते। कारोबारी अगर इस रुद्राक्ष को पहनते हैं तो फायदा उन्हें मिलने लगता है। बुध का प्रभाव होने के कारण जो भी व्यक्ति दस मुखी रुद्राक्ष को धारण करता है उसकी वाणी में भी स्पष्टता आती है। इस रुद्राक्ष को धारण करने से नकारात्मकता आपके आसपास नहीं फटकती। अगर आप जानना चाहते हैं कि किस राशि के लिए कौन सा रुद्राक्ष शुभ होता है तो इसके बारे में विस्तार से हमारी वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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