Durga Mata Ki Aarti Lyrics PDF: नवरात्रि की महानवमी 19 अक्टूबर 2026 को है तो दशमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। दशमी तिथि पर भक्त माता दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन करते हैं। विसर्जन से पहले माता की विधि विधान पूजा करके उनकी आरती उतारी जाती है। इस दिन माता दुर्गा की जय अंबे गौरी आरती को करने का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं दुर्गा जी की आरती करने से पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त हो जाता है और घर में सुख-शांति आती है। माता की आरती शुद्ध घी या कपूर के दीपक से करनी चाहिए। चलिए अब जानते हैं मां दुर्गा आरती के लिरिक्स।
दुर्गा माता की आरती लिरिक्स
- जय अम्बे गौरी,मैया जय श्यामा गौरी।
- तुमको निशिदिन ध्यावत,हरि ब्रह्मा शिवरी॥
- जय अम्बे गौरी
- माँग सिन्दूर विराजत,टीको मृगमद को।
- उज्जवल से दोउ नैना,चन्द्रवदन नीको॥
- जय अम्बे गौरी
- कनक समान कलेवर,रक्ताम्बर राजै।
- रक्तपुष्प गल माला,कण्ठन पर साजै॥
- जय अम्बे गौरी
- केहरि वाहन राजत,खड्ग खप्परधारी।
- सुर-नर-मुनि-जन सेवत,तिनके दुखहारी॥
- जय अम्बे गौरी
- कानन कुण्डल शोभित,नासाग्रे मोती।
- कोटिक चन्द्र दिवाकर,सम राजत ज्योति॥
- जय अम्बे गौरी
- शुम्भ-निशुम्भ बिदारे,महिषासुर घाती।
- धूम्र विलोचन नैना,निशिदिन मदमाती॥
- जय अम्बे गौरी
- चण्ड-मुण्ड संहारे,शोणित बीज हरे।
- मधु-कैटभ दोउ मारे,सुर भयहीन करे॥
- जय अम्बे गौरी
- ब्रहमाणी रुद्राणीतुम कमला रानी।
- आगम-निगम-बखानी,तुम शिव पटरानी॥
- जय अम्बे गौरी
- चौंसठ योगिनी मंगल गावत,नृत्य करत भैरूँ।
- बाजत ताल मृदंगा,अरु बाजत डमरु॥
- जय अम्बे गौरी
- तुम ही जग की माता,तुम ही हो भरता।
- भक्तन की दुःख हरता,सुख सम्पत्ति करता॥
- जय अम्बे गौरी
- भुजा चार अति शोभित,वर-मुद्रा धारी।
- मनवान्छित फल पावत,सेवत नर-नारी॥
- जय अम्बे गौरी
- कन्चन थाल विराजत,अगर कपूर बाती।
- श्रीमालकेतु में राजत,कोटि रतन ज्योति॥
- जय अम्बे गौरी
- श्री अम्बेजी की आरती,जो कोई नर गावै।
- कहत शिवानन्द स्वामी,सुख सम्पत्ति पावै॥
- जय अम्बे गौरी
आरती के लिए क्या सामग्री चाहिए?
- शुद्ध देसी घी का दीपक (आप कपूर से भी आरती कर सकते हैं)
- दीपक में रुई की बत्ती
- कपूर
- लौंग (घी के साथ लौंग भी प्रज्वलित कर सकते हैं)
- ताजे फूल और पुष्प
- अक्षत
- धूप या अगरबत्ती
- जल से भरी तांबे की छोटी लुटिया
- घंटी और शंख
दुर्गा माता की आरती करने की सही विधि
- आरती की थाली को माता की प्रतिमा के सामने घड़ी की सुई की दिशा में 'ॐ' की आकृति बनाते हुए घुमाना चाहिए।
- सबसे पहले माता के चरणों में 4 बार, नाभि पर 2 बार, मुख मंडल पर 1 बार और फिर पूरे शरीर पर 7 बार आरती घुमाएं।
- आरती के बाद, जलती हुई जोत या कपूर के ऊपर से हाथ फेरकर अपनी आंखों और मस्तक पर लगाएं।
- आरती धीमी गति से और पूर्ण श्रद्धा-भाव से गाई जानी चाहिए।
- आरती खत्म होने के बाद थाल में रखे हुए पुष्प को माता के चरणों में समर्पित करें।
- आरती के अंत में भगवान का ध्यान करते हुए यह मंत्र बोलें- कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि॥
- आरती के बाद सभी में प्रसाद बांट दें।
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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