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Dussehra 2026 Live: दशहरा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और रावण दहन की टाइमिंग, जानें सबकुछ यहां

 Written By: Vineeta Mandal
 Updated : Oct 20, 2026 10:41 am IST

आज जीत का प्रतीक विजयदशमी यानी दशहरा का त्योहार भी मनाया जाएगा। पुराणों के अनुसार रावण पर भगवान श्री राम की जीत के उपलक्ष्य में विजयदशमी का ये त्योहार मनाया जाता है। तो आइए जानते हैं दशहरा पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में।

दशहरा 2026- India TV Hindi
दशहरा 2026 Image Source : INDIA TV

हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार पूरे देशभर में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार, इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। दशहरा को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है। विजयादशमी को महिषासुर नामक दानव पर देवी दुर्गा की विजय के रूप में भी मनाया जाता है। विजयादशमी को दशहरा अथवा दसरा के नाम से भी जाना जाता है। नेपाल में दशहरा को दशैं के रूप में मनाया जाता है। दशहरा के दिन शमी पूजा, अपराजिता पूजा भी किया जाता है। दशहरा के दिन भगवान राम के साथ माता सीता, लक्ष्मण जी और बजरंगबली की पूजा-अर्चना करना अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। आज के दिन श्री राम की आराधना करने से घर-परिवार में सुख-समृ्द्धि का वास रहता है और खुशहाली, संपन्नता बनी रहती है। तो आइए जानते हैं दशहरा के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

दशहरा (विजयादशमी) 2026 पूजा का शुभ समय

पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का आरंभ 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर होगा। दशमी तिथि समाप्त 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा। पूजा के लिए विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से दोपहर 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1 बजकर 14 मिनट से दोपहर 3 बजे तक रहेगा।

दशहरा 2026 के दिन रावन दहन का मुहूर्त

दशहरा के दिन हर साल  रावण का पूतला जलाया जाता है, जिसे रावण दहन कहते हैं। आज यानी 20 अक्टूबर को सूर्यास्त के बाद रावण दहन किया जाएगा। 20 अक्टूबर  की शाम को सूर्यास्त के बाद लगभग शाम 05:45 बजे से रात 08:30 बजे के बीच देश के विभिन्न रामलीला मैदानों में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। बता दें कि स्थानीय रामलीला मैदान समितियों के कार्यक्रमों के अनुसार भी पुतला दहन का समय निर्धारित होता है, इसलिए रावण दहन देखने जाने से पहले अपने शहर के आयोजन की सही जानकारी जरूर लें।

दशहरा पूजा विधि

  • दशहरा के दिन सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ-सुथरे शुभ रंगों वाले कपड़े पहने लें
  • इसके बाद पूजा स्थान पर भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें। 
  • फिर विधि विधान भगवान की पूजा करें।
  • साथ ही मां दुर्गा का भी पूजन करें। 
  • देवी-देवताओं को रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प और नैवेद्य चढ़ाएं।
  • इसके बाद हवन और आरती करें।
  • फिर पूजा के बाद सभी में प्रसाद बांट दें।
  • इसके बाद शाम में रावण दहन करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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  • 9:41 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    दशहरा से जुड़ी शमी वृक्ष की कथा

    महाभारत काल में पांडवों को अज्ञातवास के दौरान अपने हथियारों को भी छुपाना पड़ा था। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान अर्जुन ने अपने धनुष को शमी वृक्ष में छुपाया था और अज्ञातवास की समाप्ति के बाद विजयादशमी के दिन उसे पुन: प्राप्त किया था। इसके बाद महाभारत के युद्ध में पांडवों ने कौरवों पर जीत हासिल की थी। तभी से शमी वृक्ष की पूजा और उसका आदान प्रदान विजयदशमी के दिन शुभ माना जाता है। 

  • 8:20 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    दशहरा पर अपराजिता पूजा की विधि

    जिस स्थान पर पूजा करनी है वहां चंदन के लेप के साथ अष्टदल चक्र बनाएं।
    इसके बाद संकल्प लें कि देवी अपराजिता की पूजा आप अपने परिवार की खुशहाली के लिए कर रहे हैं।
    फिर अष्टदल चक्र के बीच में अपराजिताय नमः मंत्र के साथ देवी अपराजिता का आह्वान करें।
    इसके बाद मां जया को दायीं तरफ क्रियाशक्त्यै नमः मंत्र के साथ आह्वान करें।
    वहीं बायीं ओर मां विजया का उमायै नमः मंत्र के साथ आह्वान करें।
    इसके बाद अपराजिताय नमः, जयायै नमः और विजयायै नमः मन्त्रों के साथ विधि विधान से पूजन करें।
    अंत में देवी से प्रार्थना करें कि हे मां मैनें यह पूजा पूरी श्रद्धा से और अपनी क्षमता के अनुसार संपूर्ण की है। कृपया मेरी पूजा स्वीकार करें।
    फिर इस मंत्र के साथ 'हारेण तु विचित्रेण भास्वत्कनकमेखला। अपराजिता भद्ररता करोतु विजयं मम।' पूजा का विसर्जन करें।

  • 7:40 AM (IST)
    Posted by Vineeta Mandal

    अपराजिता और शमी की पूजा का महत्व

    विजयदशमी के दिन अपराजिता की पूजा करने का विधान है। अपराजिता की पूजा से सालभर तक कार्यों में जीत हासिल होती है और किसी भी काम में रुकावट नहीं आती। इसके अलावा आज के दिन शमी की पूजा का भी खास महत्व बताया गया है। शमी की पूजा करने से व्यक्ति को सालभर तक यात्राओं में लाभ मिलता है, यात्रा में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती और काम में सफलता मिलती है । 

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