Ekadashi Tulsi Puja Niyam: आज 11 जून 2026, गुरुवार को परमा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। अधिकमास में आने वाली यह एकादशी 3 साल में एक बार पड़ती है। ऐसे में अधिक मास के कृष्ण पत्र की इस तिथि का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह सबसे पुण्यदायी व्रतों में से एक है। इस दिन भक्त विधि-विधान से विष्णु जी की पूजा करते हैं और उन्हें तुलसी दल अर्पित करते हैं। हालांकि, एकादशी पर तुलसी के पत्ते तोड़ने की मनाही होती है। धर्म ग्रंथों में इसके पीछे विशेष कारण बताए गए हैं। जानिए इसे लेकर शास्त्रों में क्या नियम हैं।
एकादशी पर क्यों नहीं तोड़ते तुलसी के पत्ते?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु की अत्यंत प्रिय हैं और वह मां लक्ष्मी का स्वरूप होती है। कहा जाता है कि एकादशी के दिन देवी तुलसी स्वयं विष्णु जी के लिए निर्जला व्रत करती हैं। ऐसे में इस दिन तुलसी के पौधे को जल चढ़ाना या उसके पत्ते तोड़ना शास्त्र संगत नहीं माना जाता। मान्यता है कि ऐसा करने से तुलसी जी का व्रत भंग हो सकता है और वे अप्रसन्न हो सकती हैं। शास्त्रों के अनुसार, किसी व्रती का व्रत-उपवास भंग करना महापाप माना जाता है।
पूजा के लिए क्या करें?
एकादशी की पूजा में तुलसी दल अर्पित करने के लिए एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख लें। शास्त्र अनुसार, तुलसी दल बासी नहीं होते, इसलिए पहले से तोड़े गए पत्तों का उपयोग पूजा में किया जा सकता है। यही कारण है कि एकादशी से पहले ही तुलसी दल एकत्र करने की सलाह दी जाती है।
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का महत्व
हिंदू धर्मग्रंथों में तुलसी को श्रीहरि की प्रियतम बताया गया है। तुलसी दल के बिना उनकी पूजा अधूरी है। इसलिए एकादशी पर भगवान विष्णु जी के साथ-साथ तुलसी पूजा का भी विधान है। भक्त तुलसी के सामने दीपक जलाकर विष्णु मंत्रों का जाप करते हैं।
घर में सुख-समृद्धि का प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी की नियमित पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। जबकि, एकादशी पर तुलसी पूजन से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और भक्तों पर भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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