आज बछ बारस द्वादशी है। इस दिन स्त्रियां अपनी संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत में गायों और बछड़ों की पूजा की जाती है। इसके अलावा महिलाएं शुभ मुहूर्त में बछ बारस की कथा सुनती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस व्रत पूजन में गणेश जी की कहानी सुनने का भी विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इस कहानी को सुनने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो जाता है। चलिए जानते हैं ये कौन सी कहानी है।
गणेश जी की कथा
इस कथा के अनुसार एक गांव में मां-बेटी रहती थीं। एक दिन बेटी अपनी मां से कहने लगी कि गांव के सब लोग गणेश मेला देखने जा रहे हैं, क्या मैं भी मेला देखने जाऊंगी। मां ने कहा कि मेले में बहुत भीड़ होगी, तो ऐसे में वहां जाना ठीक नहीं। कहीं गिर जाओगी तो चोट लगेगी। लड़की फिर भी नहीं मानी और मेला देखने के लिए निकल गई। मां ने जाने से पहले बेटी को दो लड्डू दिए और साथ में थोड़ा पानी भी दिया। मां ने अपनी बेटी से कहा कि एक लड्डू तो गणेश जी को खिला देना और थोड़ा पानी पिला देना। वहीं दूसरा लड्डू तुम खा लेना और बचा पानी पी लेना। मां से लड्डू और पानी लेकर लड़की मेले में चली गई। मेला खत्म होने पर सभी गांव वाले तो वापिस आ गए लेकिन लड़की वापिस नहीं आई।
लड़की मेले में गणेश जी के पास ही बैठ रही और लगातार कहती रही कि एक लड्डू और पानी गणेश जी आपके लिए और एक लड्डू और बचा हुआ पानी मेरे लिए। इस तरह पूरी रात बीत गई। तब गणेश जी भगवान ने सोचा कि अगर मैंने यह एक लड्डू और पानी नहीं पीया तो यह लड़की अपने घर नहीं जाएगी। उधर उसकी मां परेशान हो रही है। यह सोचकर गणेश जी एक लड़के के वेश में आए और उससे एक लड्डू लेकर खा लिया और उसके द्वारा लाया गया थोड़ा पानी भी पी लिया। फिर वह कहने लगे कि मांगो तुम क्या मांगना चाहती हो?
लड़की को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या मांगे? अन्न मांगे या धन या फिर अपने लिए अच्छा वर मांगे या खेत या महल। यह सब चीजें लड़की सोच ही रही थी कि भगवान ने उसका मन पढ़ लिया। गणेश जी लड़की से बोले कि तुम अपने घर जाओ और तुमने जो भी सोचा है वह सब तुम्हें मिलेगा। लड़की घर पहुंची तो मां ने पूछा कि इतनी देर कैसे हो गई? तब बेटी ने मां को सारी बात बता दी और देखते ही देखते लड़की के मन में सोची हुई हर बात पूरी हो गई। हे गणेश भगवान जैसे आपने लड़की और उसकी मां पर कृपा की वैसे ही सब पर करना। बोलो जय गणेश।।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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