1. Hindi News
  2. धर्म
  3. संतान की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए बछ बारस (गोवत्स द्वादशी) पर जरूर सुनें यह पौराणिक कथा

संतान की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए बछ बारस (गोवत्स द्वादशी) पर जरूर सुनें यह पौराणिक कथा

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Sep 07, 2026 07:48 am IST,  Updated : Sep 07, 2026 07:59 am IST

आज बछ बारस का त्योहार मनाया जा रहा है। इसे गोवत्स द्वादशी और वसु बारस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान के सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं। यहां आप जानेंगे बछ बारस की पावन कथा के बारे में।

Bach Baras Govatsa Dwadashi vrat katha- India TV Hindi
बछ बारस की पावन कथा Image Source : INDIA TV

बछ बारस का पावन पर्व 7 सितंबर 2026 को यानी आज मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान के कल्याण के लिए व्रत रखती हैं और भगवान कृष्ण की विधि विधान पूजा करती हैं। इस शुभ अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों में भगवान की गोचारण लीलाओं की झांकियां प्रस्तुत की जाती हैं। साथ ही इस पर्व पर गायों और बछड़ों की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। गोवत्स द्वादशी की पूजा गोधूलि काल में की जाती है और इस साल इस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06:36 से 08:53 बजे तक रहेगा। यहां आप जानेंगे बछ बारस (गोवत्स द्वादशी) की व्रत कथा।

बछ बारस (गोवत्स द्वादशी) की व्रत कथा

बछ बारस की कथा के अनुसार एक सास-बहू थीं। एक दिन सास को जंगल में गाय चराने जाना था और उसी दिन भाद्रपद मास की बछ बारस थी। सास जाते हुए बहू से बोली, "मैं गाय चराने जंगल जा रही हूं, तुम गेहूंले-जौले (गेहूं और जौ) को उबाल लेना।" दरअसल, 'गेहूंले' और 'जौले' उनके गाय के बछड़ों के नाम भी थे। बहू चिंता में पड़ गई कि सास ने बछड़े को उबालने के लिए क्यों कहा है? लेकिन सास ने गेहूं और जौ को उबालने के लिए कहा था पर बहू ये समझ न पाई और उसने सास की आज्ञा का पालन करते हुए गेहूं-जौ की जगह बछड़े को उबाल दिया। 

जब गाय चराकर सासूजी घर लौटीं, तो बहू से बोलीं, "बहू! आज बछ बारस है, इसलिए गेहूंले-जौले को छोड़ो पहले गाय और बछड़े की पूजा करेंगे।" यह सुनकर बहू डर के मारे कांपने लगी और मन ही मन भगवान से प्रार्थना करने लगी, "हे बछ बारस माता! मेरी लाज रखना।"

उसकी सच्ची विनती सुनकर बछ बारस माता की कृपा हुई और हांडी तोड़कर गाय के बछड़े जीवित बाहर आ गए। बछड़ों के गले में हांडी का टुकड़ा लटका रह गया था, जिसे देखकर सासूजी बोलीं, "बहू! यह क्या है?" तब बहू ने रोते हुए सासूजी को सारी बात बता दी और कहा, "सासूजी! बछ बारस माता ने मेरी लाज रख ली। भगवान ने मेरा सत रखा और बछड़ों को जीवनदान दिया।"

कहा जाता है कि इसी कारण बछ बारस के दिन गेहूं, गाय के दूध और उससे बने उत्पादों का सेवन नहीं किया जाता है। साथ ही, इस दिन चाकू या किसी भी धारदार वस्तु से कटे हुए फल व सब्जियों का सेवन भी वर्जित माना जाता है।

हे बछ बारस माता! जैसे आपने सास-बहू की लाज रखी, वैसे ही सब पर अपनी कृपा बनाए रखना।

बोलो बछ बारस माता की जय! गौ माता की जय!

बछ बारस की साहूकार वाली कथा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

यह भी पढ़ें:

आज विष्णु जी के साथ ही एकादशी माता की भी जरूर करें आरती, मनोवांछित फलों की होगी प्राप्ति, घर आएगी समृद्धि

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।