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सितंबर माह का पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा? नोट कर लीजिए सही डेट और शुभ मुहूर्त

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Sep 06, 2026 09:31 pm IST,  Updated : Sep 06, 2026 09:31 pm IST

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से भक्तों को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। तो आइए जानते हैं कि सितंबर का पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा।

भौम प्रदोष व्रत 2026- India TV Hindi
भौम प्रदोष व्रत 2026 Image Source : INDIA TV

हर माह की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष का व्रत किया जाता है जिसमें एक शुक्ल और दूसरा कृष्ण पक्ष के समय होता है। प्रदोष का व्रत भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन महादेव की उपासना करने और व्रत रखने से जातक की सभी परेशानियां शीघ्र दूर हो जाती हैं। इसके साथ ही भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। बता दें कि प्रदोष का व्रत सप्ताह के जिस दिन पड़ता है उसका नाम उसी वार के हिसाब से रखा जाता है। सितंबर का पहला प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ेगा इसलिए इसे भौम प्रदोष कहा जाएगा। तो चलिए जानते हैं कि भौम प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

भौम प्रदोष व्रत 2026 डेट

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 8 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट पर होगा। त्रयोदशी तिथि का समापन 9 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर होगा। भौम प्रदोष का व्रत 8 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। 

भौम प्रदोष व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 47 मिनट से रात 9 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। प्रदोष का का समय भगवान शिव की पूजा के लिए अति उत्तम माना जाता है। प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से सुबह 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। 

भौम प्रदोष व्रत का महत्व

बता दें कि मंगल का एक नाम भौम भी है।  मंगल का सीधा संबंध कर्ज से है। अतः आज भौम प्रदोष व्रत का दिन कर्ज से मुक्ति पाने के लिये बहुत ही श्रेष्ठ है । इस दिन मंगल से संबंधित चीज़ें गुड़, मसूर की दाल, लाल वस्त्र, तांबा आदि का दान करने से सौ गौ दान के समान फल मिलता है। वहीं मान्यता है कि त्रयोदशी तिथि की रात के पहले प्रहर में जो व्यक्ति किसी भेंट के साथ शिव प्रतिमा के दर्शन करता है उसपर भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है।   जो व्यक्ति  भौम प्रदोष व्रत करता है, भगवान शिव एवं मंगल देव की कृपा से उसे साहस, आत्मबल और निर्भयता प्राप्त होती है। यह व्रत आर्थिक बाधाओं से मुक्ति प्रदान करता है और विभिन्न प्रकार की शारीरिक परेशानियों को भी दूर करता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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