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अजा एकादशी के दिन इस कथा का जरूर करें पाठ, पूरी होगी सारी मनोकामनाएं, दूर होंगे सारे कष्ट

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Sep 06, 2026 10:43 pm IST,  Updated : Sep 06, 2026 10:45 pm IST

सोमवार को अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन व्रत रखकर नारायण और मां लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। तो यहां पढ़िए अजा एकादशी व्रत की कथा।

अजा एकादशी व्रत कथा- India TV Hindi
अजा एकादशी व्रत कथा Image Source : META AI

इस साल अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। इस दिन  भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसके अलावा एकादशी व्रत की कथा का पाठ या श्रवण करना भी अत्यंत जरूर होता है। कथा के बिना एकादशी की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है। तो यहां पढ़िए अजा एकादशी व्रत की कथा।

अजा एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, अयोध्या नगरी में हरिश्चन्द्र नाम के एक राजा हुए थे जो अपनी सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध थे। एक बार देवताओं ने उनकी परीक्षा लेने की सोची। राजा ने सपने में देखा कि उन्होंने ऋषि विश्ववामित्र को अपना राजपाट दान कर दिया है। सुबह विश्वामित्र सही में उनके द्वार पर आ गए और कहने लगे तुमने सपने में मुझे अपना राज्य दान कर दिया था। राजा ने सत्यनिष्ठ व्रत का पालन करते हुए विश्वामित्र को अपना समस्त राज्य सौंप दिया। दान की दक्षिणा चुकाने के लिए राजा हरिश्चन्द्र को पूर्व जन्म के कर्म फल के कारण ही अपनी पत्नी, बेटे एवं खुद को भी बेचना पड़ा। हरिश्चन्द्र को एक डोम ने खरीद लिया जो दाह संस्कार का काम करवाता था।

स्वयं वह एक चाण्डाल का दास बनकर उसके यहां कफन लेने का काम करने लगा किन्तु उसने इस आपत्ति के काम में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा। यही काम करते-करते कई साल बीत गए लेकिन उसे अपने इस नीच कर्म पर बड़ा दुख हुआ और फिर उसने इससे मुक्ति पाने का उपाय खोजना शुरू किया। वह इसी चिन्ता में बैठा था कि गौतम ऋषि उसके पास पहुंचे। हरिश्चन्द्र ने उन्हें अपने जीवन की दुःख-भरी कथा सुनाई। तब महर्षि गौतम ने उसे भादों माह के कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत करने का सुझाव दिया और कहा कि इस व्रत के प्रभाव से तुम्हारे सारे पाप नष्ट हो जाएंगे।

राजा हरिश्चन्द्र ने महर्षि के कहे अनुसार विधानपूर्वक उपवास किया और रात्रि जागरण किया। इस व्रत के प्रभाव से राजा के सभी पाप नष्ट हो गये और जीवन सुख से भर गया। व्रत के प्रभाव से राजा को पुनः अपने राज्य की प्राप्ति हुई। अन्त समय में हरिश्चन्द्र अपने परिवार सहित स्वर्ग लोक को गया। कहते हैं जो मनुष्य इस उपवास को विधानपूर्वक करते हैं उनके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अन्त में वे स्वर्ग को प्राप्त करते हैं। साथ ही ये भी कहा जाता है कि इस एकादशी व्रत की कथा के श्रवण मात्र से ही अश्वमेध यज्ञ के फल की प्राप्ति हो जाती है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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