1. Hindi News
  2. धर्म
  3. Garud Puran Niyam: मृत्यु के बाद चूल्हा क्यों नहीं जलाते? कारण जो घरवालों को जानने चाहिए,गरुड़ पुराण में मिलता है उल्लेख

Garud Puran Niyam: मृत्यु के बाद चूल्हा क्यों नहीं जलाते? कारण जो घरवालों को जानने चाहिए,गरुड़ पुराण में मिलता है उल्लेख

 Written By: Arti Azad
 Published : Apr 07, 2026 09:51 pm IST,  Updated : Apr 07, 2026 09:51 pm IST

Sutak Ke Niyam: हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद घर में चूल्हा न जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसका उद्देश्य आत्मा की शांति और परिवार के शोक को महत्व देना है। इसमें धार्मिक, सामाजिक और व्यवहारिक कई कारण छिपे हैं, जिन्हें समझना जरूरी है। जानें मृत्यु के बाद चूल्हा क्यों नहीं जलाते।

मृत्यु के बाद चूल्हा क्यों नहीं जलाते- India TV Hindi
मृत्यु के बाद चूल्हा क्यों नहीं जलाते Image Source : INDIA TV

Garud Puran Niyam: सनातन धर्म में जीवन के हर चरण के लिए नियम और संस्कार बनाए गए हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक कुल 16 संस्कारों का वर्णन मिलता है, जिनमें अंतिम संस्कार सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मृत्यु के बाद घर में कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है। इनमें से एक है मृत्यु के बाद चूल्हा न जलाना। इसका उद्देश्य आत्मा की शांति, परिवार के शोक की संवेदना और घर की सफाई सुनिश्चित करना है। जानिए घर में किसी की मृत्यु हो जाने के बाद चूल्हा जलाने को लेकर गरुड़ पुराण में क्या नियम बताए गए हैं।  

गरुड़ पुराण क्या कहता है?

हिंदू धर्म के ग्रंथ गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद किए जाने वाले नियमों और विधियों का विस्तार से वर्णन है। इसमें बताया गया है कि व्यक्ति के निधन के बाद कुछ समय तक घर में सामान्य गतिविधियां न करना चाहिए, ताकि आत्मा की यात्रा शांतिपूर्ण रहे और परिवार को शोक मनाने का समय मिले।

आत्मा की शांति

धार्मिक मान्यता है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति की आत्मा घर और परिवार के आस-पास रहती है। अगर इस दौरान घर में रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे खाना बनाना शुरू कर दिया जाए, तो आत्मा को अशांति हो सकती है। इसलिए मृतक की आत्मा को समय देना और परिवार को शोक मनाने का अवसर देना जरूरी है।

घर की सफाई 

मृत्यु के बाद व्यक्ति शरीर में कई तरह के कीटाणु विकसित हो सकते हैं, जो वातावरण में फैलते हैं। इसलिए मृतक के अंतिम संस्कार के बाद घर की पूरी सफाई, कपड़े धोना और स्नान जरूरी माना जाता है। ऐसे में शुद्धि पूरी होने से पहले खाना बनाना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

सूतक काल का नियम और महत्व

मृत्यु के बाद 3 से 13 दिनों तक सूतक काल माना जाता है। इस दौरान घर में कई नियमों का पालन किया जाता है, जिनमें चूल्हा न जलाना भी शामिल है। यह समय शोक, शुद्धि और आत्मिक शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सामाजिक सहयोग जैसे कई गहरे पहलू भी जुड़े हुए हैं।

मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पहलू

शोक में डूबे परिवार को खाना बनाने और अन्य कामों से समय देने से उन्हें अपने दुख को स्वीकारने में मदद मिलती है। इस दौरान रिश्तेदार और पड़ोसी खाना भेजकर सहयोग करते हैं। इससे पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं और परिवार को सांत्वना भी मिलती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें: Garud Puran Niyam: मृतक व्यक्ति की चीजों का इस्तेमाल करना कितना सही? गरुड़ पुराण खोलता है रहस्य

 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।