कर्क संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। साथ ही सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती है। जुलाई में सूर्य कर्क राशि में प्रवेश कर रहे हैं, इसे ही कर्क संक्रांति कहा जा रहा है। बता दें कि सूर्य एक माह में अपनी राशि परिवर्तन करते हैं। ऐसे में इस समय को बेहद शुभ माना जाता है। साथ ही कर्क राशि सूर्य की मित्र राशि भी है ऐसे में यह राशि परिवर्तन समय बेहद शुभ माना जा रहा है। इस दौरान सूर्य मंत्र का जप भी लाभकारी होता है।
संक्रांति क्या होती है?
जब भी सूर्य राशि परिवर्तन करते हैं तो उस दिन को संक्रांति कहा जाता है। यानि सूर्य के राशिचक्र की एक राशि से दूसरी राशि में जाने के दिन को संक्रांति कहा जाता है। जिस भी राशि में सूर्य गोचर करते हैं उस राशि के नाम से ही संक्रांति का नाम भी होता है। 16 जुलाई को सूर्य कर्क राशि में गोचर करेंगे इसलिए इस दिन को कर्क संक्रांति के नाम से जाना जाएगा। इस दौरान पक्षियों और जानवरों को भोजन कराना भी बेहद शुभ माना जाता है।
संक्रांति के दिन जरूर करें ये 4 काम
पवित्र नदियों में स्नान
कर्क संक्रांति के दौरान पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना आदि में स्नान आदि करना बेहद शुभ माना जाता है।
सूर्य देव को अर्घ्य
स्नान के बाद जातक को सूर्य देव को जल में तिल डालकर अर्घ्य देना चाहिए, इससे सूर्य कुंडली में मजबूत होता है और आपका आत्मविश्वास बढ़ता है। साथ ही करियर में भी उन्नति मिलती है।
दान
इस संक्रांति पर तिल, गुड़, खिचड़ी, कंबल, गर्म कपड़े और अपनी क्षमतानुसार धन का भी दान करना चाहिए। इससे आपका दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जाता है और पिृत भी प्रसन्न होते हैं
तिल और गुड़ का सेवन
कर्क संक्रांति पर तिल और गुड़ से बनी चीजें खाना और दान करना भी शुभ माना जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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