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मंगला गौरी व्रत के दौरान जरूर पढ़ें मां के ये चमत्कारी मंत्र, बन जाएंगे जल्द विवाह के योग

 Published : Jul 15, 2025 09:03 am IST,  Updated : Jul 15, 2025 09:03 am IST

इस बार सावन में 4 मंगला गौरी व्रत पड़ रहे हैं, जिसमें एक आज यानी 15 जुलाई को है। मान्यता है कि मां गौरी के इस व्रत को करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

मंगला गौरी व्रत- India TV Hindi
मंगला गौरी व्रत Image Source : FILE PHOTO

सावन में मंगलवार का दिन मां पार्वती को समर्पित किया गया है। इस मंगलवार को मंगला गौरी के नाम से जाना जाता है, इस दिन विवाहित अविवाहित स्त्रियां व्रत-उपासना करती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। मान्यता है कि सावन में ही देवी पार्वती की तप से प्रसन्न हो भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया था। मंगला गौरी व्रत करने से मां पार्वती के साथ ही भगवान शिव का भी आशीर्वाद मिलता है, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

इस व्रत को करने से एक तरफ सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद मिलता है तो दूसरी ओर अविवाहित कन्याओं को योग्य वर मिलने का आशीष मिलता है। इस दिन मां गौरी को प्रसन्न करने के लिए पूजा-अर्चना किए जाने का विधान है। पूजा के दौरान जातक को मां गौरी के कुछ चमत्कारी मंत्र जरूर पढ़ने चाहिए।

मां गौरी के चमत्कारी मंत्र

  • सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके।

    शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

  • हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया।
    तथा मां कुरू कल्याणि कान्तकान्तां सुदुर्लभाम्।।
  • सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके।
    शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
  • ह्रीं गौर्य नम:
  • ॐ गौरये नमः
  • ॐ साम्ब शिवाय नमः
  • ॐ पार्वत्यै नमः 
  • ॐ गौरीशंकराय नमः
  • ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः
  • ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
  • ॐ नमः पार्वतीपतये हर हर महादेव।
  • ॐ ह्रीं योगिनी योगिनी योगेश्वरी योग भयंकरी।
  • हे गौरी शंकरार्धांगी यथा त्वं शंकर प्रिया।
  • ह्रीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा।
  • ॐ नमः मनोभिलाषितं वरं देहि वरं ह्रीं ॐ गोरा पार्वती देव्यै नमः

ध्यान मंत्र

  • श्रीगणेशाम्बिकाभ्यां नम:, ध्यानं समर्पयामि।
  • नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:।
    नम: प्रकृत्यै भदायै नियता: प्रणता: स्मताम्।।
  • श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
    महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
  • या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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