1. Hindi News
  2. धर्म
  3. Navratri Day 2 Maa Brahmacharini Ki Aarti, Katha: जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता, जय चतुरानन प्रिय सुख दाता...दूसरे नवरात्र की आरती और कथा यहां देखें

Navratri Day 2 Maa Brahmacharini Ki Aarti, Katha: जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता, जय चतुरानन प्रिय सुख दाता...दूसरे नवरात्र की आरती और कथा यहां देखें

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Sep 23, 2025 08:59 am IST,  Updated : Sep 23, 2025 09:34 am IST

Navratri Day 2 Maa Brahmacharini Ki Aarti, Katha: आज नवरात्र का दूसरा दिन है। आज माता दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी का पूजन किया जायेगा। यहां ‘ब्रह्म’ शब्द का अर्थ तपस्या से है और ‘ब्रह्मचारिणी’ का अर्थ है- तप का आचरण करने वाली। इस दिन की पूजा में माता ब्रह्माचारिणी की आरती जरूर करनी चाहिए।

Maa Brahmacharini ki aarti- India TV Hindi
मां ब्रह्माचारिणी की आरती और कथा Image Source : CANVA

Navratri Day 2 Maa Brahmacharini Ki Aarti, Katha: देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने वाले व्यक्ति को अपने हर कार्य में जीत हासिल होती है। वह सर्वत्र विजयी होता है। अगर आप भी किसी कार्य में अपनी जीत सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो आज आपको देवी ब्रह्मचारिणी के इस मंत्र का जप जरूर करना चाहिए। ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:’ आज आपको इस मंत्र का कम से कम एक माला, यानि 108 बार जप करना चाहिए। इससे विभिन्न कार्यों में आपकी जीत सुनिश्चित होगी। इसके अलावा माता की आरती करना बिल्कुल भी न भूलें।

Maa Brahmacharini Ki Aarti (मां ब्रह्मचारिणी की आरती)

  • जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
  • ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
  • ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा।
  • जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
  • कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए।
  • उसकी विरति रहे ठिकाने। जो तेरी महिमा को जाने।
  • रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
  • आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
  • ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम।
  • भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी।

Maa Brahmacharini Ki Katha (मां ब्रह्मचारिणी की कथा)

सफेद वस्त्र धारण किये हुए मां ब्रह्मचारिणी के दो हाथों में से दाहिने हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल है। इनकी पूजा से व्यक्ति के अंदर जप-तप की शक्ति बढ़ती है। मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को संदेश देती हैं कि परिश्रम से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। कहते हैं नारद जी के उपदेश से मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या की थी इसलिए इन्हें तपश्चारिणी भी कहा जाता है। मां ब्रह्मचारिणी कई हजार वर्षों तक जमीन पर गिरे बेलपत्रों को खाकर भगवान शंकर की आराधना करती रहीं और बाद में उन्होंने पत्तों को खाना भी छोड़ दिया, जिससे उनका एक नाम अपर्णा भी पड़ा। लिहाजा देवी मां हमें हर स्थिति में परिश्रम करने की और कभी भी हार न मानने की प्रेरणा देती हैं।

यह भी पढ़ें:

नवरात्रि के दूसरे दिन की पूजा विधि और मंत्र

नवरात्रि में हवन कैसे करें

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।