Navratri Havan Mantra PDF (दुर्गा जी का हवन मंत्र, विधि): हिंदू धर्म में हवन करने का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं हवन करने से पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त हो जाता है। नवरात्रि में भी कई लोग हवन-पूजन करते हैं। वैसे तो इस पावन पर्व के आखिरी दो दिनों में हवन करना महत्वपूर्ण माना गया है लेकिन कई लोग हर दिन हवन करते हैं। कहते हैं हवन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और माता रानी की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। चलिए आपको बताते हैं नवरात्रि हवन मंत्र, सामग्री लिस्ट और संपूर्ण विधि।
एक सूखा नारियल, लाल रंग का कपड़ा या कलावा, मुलैठी की जड़, चंदन की लकड़ी, बेल, नीम, पीपल का तना और छाल, गूलर की छाल, आम की सूखी लकड़ियां, अश्वगंधा, ब्राह्मी, काला तिल, कर्पूर, चावल, गाय का घी, लौंग, शक्कर, रौली, मौली, अक्षत, पुष्प, इलायची, गुग्गल, जौ, हवन कुंड (Havan Kund), हवन सामग्री (Havan Samagri)।
सबसे पहले मां दुर्गा की पूजा करें। पूजा के बाद पूजा स्थल पर ही हवन कुंड स्थापित करें। पृथ्वी माता का ध्यान करें। फिर अपनी हथेली को स्वच्छ करें और उसमें तीन बार जल हथेली में लेकर निम्नलिखित मन्त्रों का उच्चारण करते हुये आचमन करना है...
इसके बाद घी का दीपक प्रज्वलित करें एवं अग्निदेव का आवाहन करें। फिर अब अपने दायें हाथ में जल लेकर निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करना है..
मंत्र है- भूलोके धर्म स्थापनार्थम् सर्वेषाम् जनानाम् सुख शान्ति सिद्ध्यर्थम् दुर्गा होमकर्म यथाशक्ति करिष्ये
इस मंत्र को बोलते हुये जल को अपने सामने भूमि पर छोड़ दें। फिर हवन कुण्ड में कुछ सूखे नारियल के टुकड़े, लकड़ी और उपले डालें। फिर कपूर की सहायता से निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये अग्नि प्रज्वलित करें।
अब नीचे दिए गए मन्त्र का उच्चारण करते हुये अग्नि में आठ बार घी डालें।
निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुये कल्पना करें कि भगवान गणेश हवन की दिव्य अग्नि में प्रवेश करके आपकी आहुतियां स्वीकार कर रहे हैं।
इस मंत्र का उच्चारण करते हुये अग्नि में पिसा हुआ चन्दन अर्पित करें।
इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये हवन में फूल अर्पित करें।
इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये एक धूपबत्ती जलाकर हवनकुण्ड के पास रखें।
इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये हवन कुण्ड को दीपक दिखायें।
इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये फल का टुकड़ा, किशमिश और बनाया गया थोड़ा सा भोजन हवन में अर्पित करें।
इन तीन मन्त्रों में से किसी भी एक का उच्चारण करते हुये यज्ञ की अग्नि में घी अर्पित करें।
आप इस प्रक्रिया को अपनी इच्छानुसार जितनी बार चाहें कर सकते हैं। यदि आप दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं तो आप समस्त 700 श्लोकों का हवन किसी आचार्य की देखरेख में कर सकते हैं या फिर आप पंचम अध्याय के श्लोक संख्या 9 से श्लोक संख्या 80 के बीच देवताओं द्वारा देवी की स्तुति का भी हवन कर सकते हैं।
अब 6 किशमिश, 6 फल या 6 फल के टुकड़े लें और इस मन्त्र का उच्चारण करें...
इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये एक गोला का टुकड़ा, बड़ी लकड़ी और थोड़ा घी हवन में अर्पित करें और साथ ही यह कल्पना करें कि आप अपना सम्पूर्ण अस्तित्व मां दुर्गा को समर्पित कर रहे हैं।
इस मन्त्र का उच्चारण करते हुये हवन में घी अर्पित करें।
इस मन्त्र या माता के किसी अन्य मन्त्र द्वारा यथाशक्ति ध्यान करें।
अन्त में इस मन्त्र का उच्चारण करें।
अंत में कपूर से आरती करें और हवन संपन्न करने के बाद कन्याओं को भोजन कराएं।
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एक नारियल के गोले में कलावा बांध लें। उसके ऊपर के भाग को काट कर उसमें घी, पान, सुपारी, लौंग, जायफल, खीर और पूरी भर लें और बची हुई हवन सामग्री भी उस नारियल में डाल दें। फिर पूर्ण आहुति मंत्र पढ़ते हुए इस गोले को हवनकुंड के बीच में रख दें। पूर्णाहुति मंत्र है: ऊँ पूर्णमद: पूर्णम् इदम् पूर्णात पूर्णादिमं उच्यते, पुणस्य पूर्णम् उदच्यते। पूर्णस्य पूर्णभादाय पूर्णमेवावाशिष्यते।।
नवरात्रि नवमी हवन मुहूर्त 1 अक्टूबर की सुबह 06:14 से शाम 06:07 बजे तक रहेगा।
(नोट: यह एक संक्षिप्त और सरल विधि है जिसके जरिए आप खुद ही घर पर आसानी से हवन पूजन कर सकते हैं। लेकिन विशेष हवन पूजन किसी योग्य विद्वान द्वारा ही कराएं।)
नवरात्रि के हवन में दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का विशेष महत्व माना जाता है। आप इन मंत्रों से भी हवन में आहुतियां दे सकते हैं...
1. या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
2. या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
3. या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
4. या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
5. या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
6. या देवी सर्वभूतेषु च्छायारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
7. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
8. या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
9. या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
10. या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
11. या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
12. या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
13. या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
14. या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
15. या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
16. या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
17. या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
18. या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
19. या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
20. या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
21. या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
22. इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भुतानाञ्चाखिलेषु या ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
23. चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद् व्याप्य स्थिता जगत् ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
24. स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रया । त्तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता ।
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी । शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः ।। स्वाहा
25. या साम्प्रतं चोद्धतदैत्यतापितै । रस्माभिरीशा च सुरैर्नमस्यते ।
या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति नः । सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः ।। स्वाहा
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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