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Ekadashi Par Baal Done Chahiye ya Nahi: पापमोचनी एकादशी 15 मार्च को, क्या एकादशी के दिन बाल धोना सही है? जानिए शास्त्रों के नियम

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Mar 14, 2026 08:41 am IST,  Updated : Mar 14, 2026 08:41 am IST

Ekadashi Par Baal Done Chahiye ya Nahi: पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च को रखा जाएगा। इस दिन विष्णु जी की पूजा होती है। मान्यताओं के अनुसार, एकादशी पर बाल धोने से बचना चाहिए। अगर बाल धोना बहुत जरूरी हो तो क्या एकादशी के दिन बाल धोना सही है? यहां जानिए

एकादशी के दिन बाल धोना चाहिए या नहीं- India TV Hindi
एकादशी के दिन बाल धोना चाहिए या नहीं Image Source : FREEPIK

Ekadashi Par Baal Done Chahiye ya Nahi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बेहद  महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है। साल 2026 में पापमोचनी एकादशी 15 मार्च को पड़ रही है। इस दिन व्रत, पूजा और नियमों का विशेष महत्व है। अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि एकादशी के दिन बाल धोना चाहिए या नहीं। घर के बड़े-बुजुर्ग भी इस दिन बाल धोने, नाखून काटने या साबुन के इस्तेमाल से मना करते हैं। तो चलिए जानते हैं कि एकादशी के दिन बाल धोने को लेकर शास्त्रों में क्या नियम बताए गए हैं। 

एकादशी पर बाल क्यों नहीं धोने चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी का दिन मन और शरीर की पवित्रता के लिए समर्पित होता है। इस दिन कई लोग विशेष नियमों का पालन करते हैं। माना जाता है कि सिर धोते समय पानी के साथ सिर पर मौजूद बहुत सूक्ष्म जीवों की अनजाने में मृत्यु हो सकती है। चूंकि एकादशी व्रत में अहिंसा के सिद्धांत का पालन करना जरूरी माना गया है, इसलिए इस दिन बाल धोने से बचने की सलाह दी जाती है।

भक्ति को महत्व 

एकादशी का दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित है। इस दिन बाहरी साज-सज्जा या शारीरिक शृंगार से ज्यादा मन की शुद्धता और भक्ति को महत्व दिया गया है। इसलिए धार्मिक परंपराओं में बाल धोने या सौंदर्य प्रसाधनों के उपयोग को विलासिता से जोड़कर देखा जाता है, जिससे भक्ति से ध्यान भटक सकता है।

बाल धोना जरूरी हो तो क्या करें?

कभी-कभी परिस्थितियों के कारण बाल धोना जरूरी हो सकता है। ऐसे में मान्यता के अनुसार, एकादशी से एक दिन पहले यानी दशमी तिथि पर बाल धो लेना बेहतर माना जाता है। इससे स्वच्छता भी बनी रहती है और एकादशी के दिन व्रत के नियमों का पालन भी आसानी से किया जा सकता है।

शास्त्रों में क्या बताया गया है?

धार्मिक ग्रंथों में एकादशी के दिन संयम और सादगी बनाए रखने पर जोर दिया गया है। पद्म पुराण के 'क्रियायोगसार' खंड में वर्णित है कि एकादशी पर व्रती को दातुन करने और बाल धोने से बचना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की हिंसा न हो। इस दिन पूजा, जप, दान को विशेष महत्व दिया जाता है, ताकि व्रत का पूरा फल प्राप्त हो।

पापमोचनी एकादशी तिथि 2026 कब से कब तक

पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 मार्च को सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर शुरू हो गई है, जिसका समाप्ति 15 मार्च 2026 को सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर होगी। उदया तिथि के आधार पर एकादशी का व्रत 15 मार्च, रविवार को रखा जाएगा। अगले दिन व्रत का पारण किया जाएगा। 16 मार्च को सुबह 9 बजकर 40 मिनट तक द्वादशी तिथि रहेगी। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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